

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

As soon as the stolen mobile was activated with a different SIM card, the CEIR provided a lead, and the Kawardha police recovered 100 phones.
कवर्धा। चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन की तलाश में साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने तकनीकी जांच और CEIR पोर्टल की मदद से करीब 100 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद मोबाइल की अनुमानित कीमत लगभग 25 लाख रुपए बताई गई है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी मोबाइल उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए गए।
पुलिस के अनुसार मोबाइल गुम या चोरी होने की शिकायत मिलने के बाद संबंधित फोन के IMEI नंबर को CEIR पोर्टल पर दर्ज कर ब्लॉक किया गया था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी माध्यम से इन मोबाइल की गतिविधियों पर नजर रखी।जांच के दौरान केवल मोबाइल इस्तेमाल कर रहे व्यक्ति की जानकारी जुटाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई। IMEI नंबर, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों का आपस में मिलान किया गया। इस प्रक्रिया से मोबाइल के वास्तविक मालिकों की पहचान कर उन्हें फोन वापस किए गए।
CEIR यानी सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर वस्था गुम और चोरी हुए मोबाइल की पहचान में पुलिस की मदद करती है। शिकायत दर्ज होने के बाद मोबाइल का IMEI नंबर पोर्टल पर ब्लॉक कर उसे काली सूची में शामिल किया जाता है।इसके बाद यदि कोई व्यक्ति उस मोबाइल में दूसरा सिम कार्ड डालकर इस्तेमाल करता है, तो नेटवर्क के जरिए डिवाइस की पहचान IMEI नंबर से की जा सकती है। यही जानकारी पुलिस को मोबाइल की लोकेशन और इस्तेमाल से जुड़े सुराग हासिल करने में मदद करती है।
मोबाइल नंबर सिम कार्ड से जुड़ा होता है, इसलिए सिम बदलने पर मोबाइल नंबर भी बदल सकता है। इसके विपरीत IMEI नंबर हैंडसेट की पहचान से जुड़ा होता है और सामान्य परिस्थितियों में सिम बदलने से इसमें बदलाव नहीं होता।CEIR में मोबाइल की स्थिति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। वैध IMEI वाले उपकरण सफेद सूची में, संदिग्ध उपकरण ग्रे सूची में और चोरी या गुम हुए ब्लॉक मोबाइल काली सूची में दर्ज किए जाते हैं।
एसपी जितेंद्र कुमार यादव के मुताबिक बरामद किए गए 100 मोबाइल की कुल अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपए है। सत्यापन के बाद सभी फोन संबंधित मालिकों को वापस कर दिए गए।यह कार्रवाई साइबर पुलिस टीम ने निरीक्षक उमाशंकर राठौर के नेतृत्व में की। पुलिस ने मोबाइल की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग मामलों को जोड़कर बरामदगी की प्रक्रिया पूरी की।