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A terrifying digital arrest trap: A retired professor was duped of ₹1.4 crore, and was confined to his home for 7 days.
बिलासपुर। साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को टेरर फंडिंग के झूठे आरोप में फंसाकर करीब 1.4 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। जालसाजों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताकर महिला को 7 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और इसे डिजिटल अरेस्ट का नाम दिया।
फर्जी एजेंसियों के नाम पर डर का खेल सुप्रीम कोर्ट और ईडी के नकली नोटिस से बनाया दबाव
रिटायर्ड प्रोफेसर प्रोफेसर रमन श्रीवास्तव पर आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर संपर्क किया। उन्हें सुप्रीम कोर्ट और ईडी के फर्जी नोटिस भेजे गए और यह दावा किया गया कि वह प्रतिबंधित संगठन को फंडिंग कर रही हैं।डर और भ्रम के माहौल में महिला को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया और मानसिक रूप से दबाव बनाया गया।
7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट घर में रहते हुए भी बनी रहीं साइबर कैद की शिकार
ठगों ने महिला को लगातार वीडियो कॉल पर रखा और उन्हें बताया कि उनका फोन टैप किया जा रहा है और अगर सहयोग नहीं किया गया तो जेल भेज दिया जाएगा।इसी डर के चलते महिला ने 7 दिनों के भीतर अलग अलग खातों में चार किस्तों में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
21 अप्रैल को 20.20 लाख रुपये
22 अप्रैल को 34.20 लाख रुपये
23 अप्रैल को 15.20 लाख रुपये
24 अप्रैल को 35.20 लाख रुपये
कुल मिलाकर 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की ठगी कर ली गई।
झूठे वारंट और 50 लाख की अतिरिक्त मांग से खुला पूरा मामला
27 अप्रैल को जालसाजों ने ईडी का फर्जी वारंट निरस्त होने का पत्र भेजकर 50 लाख रुपये और की मांग की। इसी दौरान जब पीड़िता के पास पैसे खत्म हो गए तो उन्होंने अपने बेटे प्रशांत श्रीवास्तव को फोन किया, जो मुंबई में रहते हैं।बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचे, जहां पूरी साजिश का खुलासा हुआ।
परिवार की हालत और पुलिस जांच अकेली महिला को बनाया गया निशाना
पीड़िता का बेटा प्रशांत श्रीवास्तव एक एचआर कंसल्टेंसी में डायरेक्टर हैं। उन्होंने बताया कि उनकी 82 वर्षीय मां बिलासपुर में अकेले रहती थीं और जालसाजों ने उनकी स्थिति का फायदा उठाया।मामले की जानकारी मिलने के बाद रेंज साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर अपराध का नया चेहरा डिजिटल अरेस्ट बन रहा खतरनाक ट्रेंड
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को मानसिक रूप से बंधक बनाकर ठगी कर रहे हैं। फर्जी नोटिस, वीडियो कॉल और सरकारी एजेंसियों के नाम पर डर पैदा कर यह नया साइबर ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।