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A worldwide framework is essential to curb cyber fraud and deepfakes: PM Modi
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कि साइबर फ्रॉड और डीपफेक कंटेंट को रोकने के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क की जरूरत है। साइबर फ्रॉड और साइबर अपराध के लिए कोई सीमा मायने नहीं रखती। इसे रोकने के लिए पूरी दुनिया को एक साथ आगे आना होगा। सभी देशों की सरकारों से लेकर वित्तीय संस्थानों, टेलीकॉम ऑपरेटर्स और टेक्नोलॉजी वाली कंपनियों को इस फ्रेमवर्क से जुड़ना होगा। अभी किसी एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देश की टेक्नोलॉजी के मदद से किसी तीसरे देश में फ्रॉड कर देता है। हम विश्व की सभी टेलीकॉम कंपनियों और संबंधित प्लेटफॉर्म से इस प्रकार के फ्रॉड को रोकने के लिए मिलकर एक वैश्विक मैकेनिज्म बनाने का आग्रह करते हैं। आज के समय में डीपफेक कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है, यह भी हम देख रहे हैं। इसके लिए भी एक वैश्विक फ्रेमवर्क पर काम करने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा, कि टेक्नोलॉजी का प्रसार तभी होता है, जब वह भरोसा हासिल करती है। भारत ने इस दिशा में अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखा है और अपने अनुभवों को विश्व के साथ साझा करने के लिए हमेशा तैयार है।
गुरुवार को मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में प्रधानमंत्री ने कहा, कि फोन और नेटवर्क की सुरक्षा हम सभी की प्राथमिकता है। एक सामान्य नागरिक के लिए भरोसा बहुत अहम है। जब उसे फोन आए तो उसे पता हो, कि कौन कॉल कर रहा है। जब मैसेज आए तो उसे पता हो कि वह असली है या फर्जी। जब फोन से भुगतान हो तो उसे विश्वास हो कि उसका पैसा सुरक्षित है। जब वह किसी फार्म पर अपना डेटा दे तो उसे विश्वास हो कि उसका डेटा सुरक्षित है। पीएम मोदी ने कहा, कि बीते वर्षों में भारत ने कंज्यूमर से क्रिएटर बनने की यात्रा तय की है। अब भारत उस लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है, जहां उत्पाद का डिजाइन भी भारत में तय होगा।
इस अवसर पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, कि वर्ष 2030 तक भारत ने एक अरब लोगों को 5जी सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। अभी देश में 55 करोड़ लोग 5जी सेवा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, कि भारत 4जी के विस्तार के मामले में पीछे रह गया था, 5जी में हमने सबसे तेज गति से इसका प्रसार किया और अब 6जी में भारत दुनिया का नेतृत्व करने जा रहा है। 6जी सुविधा शुरू करने की दिशा में काम करने वाले भारत 6जी अलायंस से 90 संस्थाएं जुड़ चुकी हैं, जिन्होंने 7700 पेटेंट दाखिल किए हैं। उन्होंने कहा, कि मोबाइल फोन के निर्माण और निर्यात में भारत दूसरे नंबर पर है। आज दुनिया में सबसे सस्ता डाटा भारत में मिलता है। वर्ष 2014 में एक जीबी डाटा का शुल्क 268 रुपए था, जो अभी मात्र 8 रुपए है। आज देश के 1 अरब 35 करोड़ लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 1 अरब 10 करोड़ लोग ब्रॉडबैंड डाटा से जुड़ चुके हैं।