

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

dhamtari linesh sahu suicide case religious conversion pressure wife in laws sentenced
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोपों से जुड़े आत्महत्या के एक मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने युवक लिनेश साहू की आत्महत्या के मामले में उसकी पत्नी, सास-ससुर और दो सालियों समेत पांच लोगों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर 500-500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत कार्रवाई की गई थी।
करीब दो साल पुराने इस मामले में मृतक के मोबाइल फोन में मिले वॉट्सऐप स्टेटस और अन्य साक्ष्य अहम रहे। लिनेश ने आत्महत्या से पहले अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने तथा मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए थे। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
घर में फंदे पर लटका मिला था लिनेश का शव
मामला धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र का है। पोटियाडीह गांव निवासी लिनेश साहू (30) टेलरिंग का काम करता था। उसकी शादी रायपुर निवासी करुणा साहू से हुई थी। शादी के बाद शुरुआती करीब एक साल तक दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य बताया गया। इस दौरान उनके एक बच्चे का भी जन्म हुआ।
हालांकि, बाद में पति-पत्नी के बीच विवाद की स्थिति बनने लगी। लिनेश के परिजनों की शिकायत और पुलिस की जांच में आरोप सामने आए कि उस पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इसी बीच 7 दिसंबर 2024 को लिनेश ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

परिजनों ने जब उसे फंदे पर लटका देखा, तो घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान जब पुलिस ने लिनेश का मोबाइल फोन खंगाला, तो उसके वॉट्सऐप स्टेटस पर ऐसे संदेश मिले, जिनमें उसने पत्नी और ससुराल पक्ष के लोगों से परेशान होने की बात लिखी थी।
सुसाइड से पहले वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाए थे आरोप
लिनेश ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस में पत्नी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया था। उसने लिखा था कि वह अपनी पत्नी से परेशान हो चुका है और उसे बार-बार ईसा मसीह का नाम लेकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहा जाता था।
उसने अपने स्टेटस में यह भी आरोप लगाया था कि जब वह ससुराल जाता था, तब उसकी सास और दोनों सालियां भी उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाती थीं। उसके मुताबिक, उससे कहा जाता था कि पहले वह ईसाई धर्म अपना ले, इसके बाद उसके माता-पिता को भी इसके लिए राजी कर लिया जाएगा।
लिनेश ने अपने संदेश में यह भी लिखा था कि इसी वजह से उसने ससुराल में खाना तक नहीं खाया था। हालांकि, ये बातें उसके द्वारा लगाए गए आरोप थे, जिनकी जांच पुलिस ने अन्य साक्ष्यों के साथ की।
शादी से पहले धर्म को लेकर जानकारी छिपाने का भी आरोप
लिनेश ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस में शादी से पहले धोखे में रखने का आरोप भी लगाया था। उसका कहना था कि पत्नी की शिक्षा और धर्म के बारे में उसे जो जानकारी दी गई थी, वह बाद में अलग निकली।
उसने दावा किया था कि पत्नी की पढ़ाई आठवीं कक्षा तक हुई थी, जबकि उसे 12वीं पास बताया गया था। इसी तरह, उसके अनुसार शादी से पहले पत्नी के ईसाई धर्म से जुड़े होने की जानकारी भी छिपाई गई थी।
लिनेश ने यह भी आरोप लगाया था कि वह हफ्तेभर में जितनी कमाई करता था, वह अपनी पत्नी को दे देता था, लेकिन इसके बावजूद उसके साथ प्यार से व्यवहार नहीं किया जाता था।
धर्म परिवर्तन नहीं करने पर बच्चे से दूर रखने का आरोप
इस मामले में सामने आए आरोपों में सबसे अहम बात यह भी थी कि लिनेश के ईसाई धर्म नहीं अपनाने पर उसे अपने बच्चे से दूर रखा जाता था। परिजनों की शिकायत और पुलिस की जांच में धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने जांच के दौरान लिनेश का मोबाइल फोन जब्त किया। उसमें मौजूद वॉट्सऐप स्टेटस और संदेशों को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया। इन संदेशों के अलावा अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने उसकी पत्नी और ससुराल पक्ष के चार अन्य सदस्यों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।
कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सुनाई सजा
मामले में सरकारी वकील गीतेश प्रजापति के मुताबिक, अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत सभी को पांच-पांच साल के कारावास और 500-500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
इस तरह लिनेश की पत्नी, सास, ससुर और दोनों सालियों को इस मामले में दंडित किया गया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब करीब दो साल पहले हुई इस घटना को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
वॉट्सऐप स्टेटस बना जांच का अहम हिस्सा
लिनेश साहू की आत्महत्या के बाद उसके मोबाइल फोन में मिले संदेशों ने जांच को महत्वपूर्ण दिशा दी। आत्महत्या से पहले लिखे गए स्टेटस में उसने जिन परिस्थितियों का जिक्र किया था, वे मामले की जांच का हिस्सा बने। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर कार्रवाई की और मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत के फैसले के साथ ही इस मामले में पांच लोगों को सजा सुनाई गई है। यह घटना पारिवारिक विवाद, कथित मानसिक प्रताड़ना और धर्म परिवर्तन के दबाव से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में रही है।