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AI has written the verdict. This order of the Delhi High Court has created a stir. Learn the entire matter and why the trial court was stayed.
नई दिल्ली। एक अहम मामले ने न्यायिक प्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि आदेश की भाषा और संरचना से यह आशंका जताई जा रही है कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया हो सकता है।
यह मामला एबीएस टूर एंड ट्रेवल्स और अकासा एयर के बीच वित्तीय विवाद से जुड़ा है। टूर ऑपरेटर ने त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली-गोवा और गोवा-दिल्ली रूट पर 640 सीटें बुक की थीं, जिसके लिए अग्रिम भुगतान किया गया था। बाद में बुकिंग रद्द होने और राशि लौटाए जाने के बाद विवाद बढ़ गया और मामला अदालत तक पहुंचा।
हाई कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में कुछ कानूनी संदर्भ ऐसे पाए गए हैं जो संदिग्ध हैं या अस्तित्व में नहीं दिखते। इसी आधार पर अदालत ने प्रथम दृष्टया आशंका जताई कि निर्णय तैयार करने में AI का उपयोग हुआ हो सकता है, हालांकि इस पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही दिया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि यह पाया जाता है कि आदेश में ऐसे कानूनों का हवाला दिया गया है जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं है, तो यह गंभीर चिंता का विषय होगा। इसी कारण अदालत ने मामले का रिकॉर्ड तलब करते हुए अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब एबीएस टूर एंड ट्रेवल्स ने त्योहारी सीजन में भारी संख्या में टिकट बुक किए थे और बाद में एयरलाइन द्वारा बुकिंग रद्द किए जाने पर धनवापसी और हर्जाने को लेकर मामला अदालत में पहुंच गया।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक का उपयोग किस सीमा तक स्वीकार्य है और क्या AI आधारित ड्राफ्टिंग से न्यायिक आदेशों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।