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TCS sexual harassment case: Victim alleges pressure to convert; details revealed in charge sheet.
नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) कार्यालय में कथित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण मामले की चार्जशीट में कई नए खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से एक सुनियोजित रणनीति के तहत कुछ कर्मचारियों को निशाना बनाया। मामले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच जारी है।
पीड़ितों को धार्मिक वीडियो दिखाने के आरोप
चार्जशीट के अनुसार, एक पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि उसे इस्लाम से जुड़े वीडियो और भाषण सुनने के लिए प्रेरित किया जाता था। महिला का आरोप है कि उसे मंदिर जाने और भजन सुनने से भी मना किया गया। जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि कुछ आरोपियों ने धार्मिक विचारों को प्रभावित करने के उद्देश्य से विभिन्न धार्मिक उपदेशकों के वीडियो देखने की सलाह दी थी।
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप
पीड़िता के बयान के मुताबिक, एक आरोपी ने शादी का आश्वासन देकर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में उसका मानसिक एवं भावनात्मक शोषण किया। महिला ने आरोप लगाया कि उसकी निजी और वित्तीय जानकारी भी हासिल कर ली गई थी तथा उसे धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाता था।
106 गवाहों के बयान चार्जशीट में शामिल
जांच एजेंसी द्वारा अदालत में पेश चार्जशीट में 106 गवाहों के बयान शामिल किए गए हैं। इनमें शिकायतकर्ता महिलाएं, उनके परिजन, TCS के कर्मचारी और प्रबंधन से जुड़े लोग, POSH समिति के सदस्य तथा जांच अधिकारी शामिल हैं।
नौ महिलाओं ने दर्ज कराई शिकायत
मामले की शुरुआत मार्च 2026 में पहली एफआईआर दर्ज होने के साथ हुई थी। इसके बाद TCS के नासिक कार्यालय में कार्यरत आठ अन्य महिलाओं ने भी शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों में यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव, मानसिक प्रताड़ना और आपत्तिजनक टिप्पणियों के आरोप लगाए गए हैं।
व्हाट्सएप ग्रुप और 'टारगेट' चुनने के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से एक व्हाट्सएप ग्रुप संचालित किया जा रहा था, जहां कर्मचारियों को लेकर चर्चा होती थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि आर्थिक या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे कर्मचारियों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता था। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई के दौरान होगी।
पीड़िताओं ने लगाए गंभीर आरोप
कुछ शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कार्यालय के भीतर और बाहर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। शिकायतों में अश्लील टिप्पणियां, अवांछित शारीरिक संपर्क और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले कथित बयानों का भी उल्लेख किया गया है। कई पीड़िताओं का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
HR प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियों ने कंपनी के एक HR अधिकारी की भूमिका की भी जांच की है। आरोप है कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और कुछ मामलों में पीड़ितों को ही समझाने या चुप रहने के लिए कहा गया। इस संबंध में भी जांच जारी है।
अग्रिम जमानत याचिका को नहीं मिली राहत
मामले में आरोपी निदा खान ने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी। वहीं, अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई जारी है।
कंपनी ने दोहराई जीरो-टॉलरेंस नीति
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए TCS ने पहले जारी अपने बयान में कहा था कि कंपनी कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या जबरदस्ती के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाती है। कंपनी ने जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की बात भी कही है।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
विशेष जांच दल (SIT) फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, 12 से अधिक संभावित पीड़ितों की पहचान की गई है और डिजिटल साक्ष्यों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने और अदालत में सुनवाई के बाद ही आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय होगा।