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AI to transform teaching methods in Chhattisgarh's government schools... the system will provide feedback after identifying learning gaps among students.
रायपुर। सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई को विद्यार्थियों की जरूरत के मुताबिक ढालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद लेने की तैयारी है। रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय AI कॉन्क्लेव में शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर विशेषज्ञों, शिक्षकों और अधिकारियों ने विचार साझा किए। कॉन्क्लेव में इस बात पर जोर दिया गया कि AI शिक्षक की जगह नहीं लेगा, बल्कि शिक्षक के लिए एक सहायक व्यवस्था के तौर पर काम करेगा।विशेषज्ञों के अनुसार AI की मदद से यह पता लगाने में आसानी हो सकती है कि कोई विद्यार्थी किस विषय या अवधारणा को समझने में पीछे रह रहा है। इसके आधार पर बच्चे के सीखने की जरूरत के अनुरूप सामग्री, अभ्यास और फीडबैक उपलब्ध कराया जा सकेगा।
कॉन्क्लेव में बताया गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति, समझने का तरीका और पारिवारिक-सामाजिक परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को एक ही तरीके से पढ़ाने की व्यवस्था में कई बच्चों की वास्तविक जरूरत सामने नहीं आ पाती।विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि पिछले करीब 10 वर्षों में विद्यार्थियों के बीच लर्निंग गैप बढ़ा है। सामान्य डिजिटल कंटेंट और ई-लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं का लाभ भी सभी बच्चे समान रूप से नहीं ले पाते। AI आधारित पर्सनलाइजेशन सिस्टम का उद्देश्य इसी अंतर को पहचानना और विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुसार पढ़ाई को अधिक उपयोगी बनाना होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में AI और LLM आधारित सिस्टम जरूरत के अनुसार लेसन प्लान, अध्ययन सामग्री और असेसमेंट तैयार करने में मदद करेगा। इससे शिक्षक को अलग-अलग स्तर के विद्यार्थियों के लिए सामग्री तैयार करने में सहयोग मिल सकता है।दूसरी ओर शिक्षक की भूमिका बच्चों के साथ संवाद, भरोसा कायम करने और नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण रहेगी। विशेषज्ञों ने कहा कि AI तकनीकी सहायता दे सकता है, लेकिन शिक्षक के मानवीय जुड़ाव का विकल्प नहीं बन सकता।
कॉन्क्लेव के दौरान शिक्षकों ने AI आधारित कॉपी जांच को लेकर भी सवाल किए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि CBSE परीक्षाओं में कॉपियों की जांच सीधे AI के माध्यम से नहीं की गई थी, बल्कि ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन की व्यवस्था अपनाई गई थी।बताया गया कि AI आधारित मूल्यांकन टूल विकसित करने से पहले करीब 10 से 20 हजार कॉपियों की जांच शिक्षकों से कराई गई। इसके बाद AI के परिणामों को शिक्षकों के मूल्यांकन से मिलाकर सिस्टम को फाइन ट्यून किया गया, ताकि दोनों के परिणामों में अधिक समानता लाई जा सके।
शिक्षकों के सवालों के जवाब में विशेषज्ञों ने एक ऐसे AI प्रोडक्ट का उदाहरण भी दिया, जिससे करीब 55 लाख बच्चे जुड़े होने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम परीक्षण के शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुका है और इसमें बदलाव के अनुसार सुधार किए जाते हैं।साथ ही AI को बिना किसी नियंत्रण के इस्तेमाल करने के बजाय उचित फिल्टर और निगरानी के साथ उपयोग करने पर जोर दिया गया। उद्देश्य यह है कि तकनीक बच्चों की पढ़ाई में सहायक बने और गलत या अनुपयुक्त जानकारी के प्रभाव को कम किया जा सके।
कॉन्क्लेव के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शाला त्यागी बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विकसित 'लइका चिन्हारी' ऐप का विमोचन किया। ऐप के जरिए स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें फिर से शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।मंत्री ने कहा कि कॉन्क्लेव में सामने आए विचार और तकनीकी समाधान शिक्षकों के लिए उपयोगी सहायक संसाधन तैयार करने में मदद करेंगे।
स्कूल शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह ने कहा कि तकनीकी बदलाव के दौर में AI का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने दोहराया कि AI शिक्षकों का विकल्प नहीं, बल्कि उनका सहयोगी होगा।समग्र शिक्षा आयुक्त किरण कौशल ने बताया कि AI की सहायता से स्मार्ट क्लास और ICT लैब को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इससे उपलब्ध तकनीकी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर विद्यार्थियों तक सरल और सुगम शिक्षा पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
कॉन्क्लेव में मेट्री AI के फाउंडर रोहित कश्यप ने बच्चों के साथ AI के उपयोग पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि उन्होंने जशपुर, नारायणपुर, धमतरी और बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों के बच्चों को AI की जानकारी दी है।उन्होंने बच्चों को स्मार्टफोन और AI के इस्तेमाल को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक AI का उपयोग पढ़ाई, नई चीजें सीखने और रचनात्मक क्षमता विकसित करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को AI पर पूरी तरह निर्भर होने के बजाय अपनी सोच, जिज्ञासा और मेहनत को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव में गूगल, वाधवानी AI, अमेजन, माइक्रोसाफ्ट, एडोब, खान एकेडमी और फिजिक्स वाला सहित कई तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। IIT भिलाई, IIM रायपुर, NIT रायपुर और CHiPS से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार और प्रस्तुतियां साझा कीं।कॉन्क्लेव में सामने आए नवाचारों और तकनीकी समाधानों का अध्ययन करने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के लिए व्यापक AI रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसके जरिए शिक्षकों के लिए तकनीकी सहायक संसाधन विकसित करने और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में आगे की रणनीति तय होगी।
इस राज्य स्तरीय आयोजन में छत्तीसगढ़ के सभी पांच संभागों से शिक्षक शामिल हुए। प्रस्तुतियों और संवाद के जरिए शिक्षकों को AI के संभावित उपयोग, सीमाओं और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। विभाग का लक्ष्य तकनीक को शिक्षा व्यवस्था में इस तरह शामिल करना है कि उसका लाभ विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों तक पहुंच सके।