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Bhupesh Baghel and Vishnu Deo Sai lock horns again over the Tara coal block; responding to the challenge for a debate, the CM said the facts are before the public.
रायपुर। हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। बघेल ने कहा कि तारा कोल ब्लॉक को लेकर दोनों पक्ष दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर आमने-सामने चर्चा कर सकते हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री साय ने इस चुनौती को लेकर कहा कि सरकार इस मामले से जुड़े तथ्य जनता के सामने रख रही है और फिलहाल बहस की जरूरत नहीं है।भूपेश बघेल ने यह मुद्दा अंबिकापुर में कांग्रेस के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हसदेव क्षेत्र की नौ कोयला खदानों को नीलामी से बाहर रखने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। उनका कहना है कि विधानसभा में भी हसदेव क्षेत्र में नई खदानों में खनन नहीं करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
बघेल के मुताबिक कांग्रेस सरकार ने हसदेव क्षेत्र को घने जंगल और कैचमेंट एरिया का हवाला देते हुए केंद्र से खनन गतिविधियों पर रोक की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय कोयला मंत्री से मुलाकात कर तारा समेत हसदेव क्षेत्र के कोल ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने का आग्रह किया गया था।ताजा विवाद के बीच 2023 में राज्य सरकार की ओर से तारा समेत हसदेव क्षेत्र के नौ कोल ब्लॉकों को व्यावसायिक नीलामी से बाहर रखने का अनुरोध किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। हालांकि केंद्रीय कोयला मंत्रालय के अनुसार दिसंबर 2025 में राज्य सरकार ने तारा कोल ब्लॉक को दोबारा नीलामी प्रक्रिया में शामिल करने का अनुरोध किया था। मंत्रालय के मुताबिक इसके बाद ब्लॉक की सीमा में संशोधन कर उसे 15वें नीलामी दौर में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बघेल की बहस की चुनौती पर कहा कि सरकार की ओर से तारा कोल ब्लॉक के संबंध में आवश्यक तथ्य जनता के सामने रखे जा रहे हैं। उनके मुताबिक अभी केवल नीलामी की प्रक्रिया पूरी हुई है, जबकि पर्यावरणीय स्वीकृति समेत अन्य वैधानिक मंजूरियां अभी बाकी हैं।साय ने इसी आधार पर कहा कि इस स्तर पर बहस की आवश्यकता नहीं है। सरकारी पक्ष के अनुसार कोयला खनन तभी शुरू हो सकेगा, जब संबंधित वैधानिक, वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त होंगी।
तारा रिवाइज्ड कोल ब्लॉक की नीलामी हसदेव अरण्य को लेकर लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और पर्यावरणीय विवाद के बीच हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक नीलामी प्रक्रिया में नौ बोलियां मिलीं और सफल बोली में 37.5 प्रतिशत राजस्व हिस्सेदारी तय हुई। केंद्र सरकार ने कहा है कि दिसंबर 2025 में राज्य के अनुरोध के बाद ब्लॉक की सीमा में बदलाव किया गया था।वहीं कांग्रेस और हसदेव बचाओ आंदोलन से जुड़े संगठनों ने नीलामी पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि हसदेव अरण्य में नई खनन गतिविधियां पर्यावरण और स्थानीय समुदायों से जुड़े सवाल खड़े करती हैं। इन संगठनों ने नीलामी रद्द करने की मांग भी उठाई है।
तारा कोल ब्लॉक का विवाद अब केवल नीलामी तक सीमित नहीं रहा है। 2023 में ब्लॉकों को नीलामी से बाहर रखने के राज्य सरकार के अनुरोध और दिसंबर 2025 में तारा ब्लॉक को फिर नीलामी में शामिल करने के अनुरोध को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे से सवाल कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राज्य सरकार और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर दस्तावेजों और पुराने निर्णयों को लेकर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।