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Accounts remain unsettled months after paddy procurement... now, the bigger picture of the shortfall is emerging.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी खत्म हुए छह महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन धान की खरीदी, भंडारण और उठाव का अंतिम हिसाब अभी तैयार नहीं हो पाया है। प्रदेश के कुछ हिस्सों, खासकर बस्तर में अब भी धान का उठाव जारी है।प्रारंभिक भौतिक सत्यापन और लेखा मिलान में करीब 1.16 लाख टन धान की कमी सामने आई है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 250 करोड़ रुपए बताई जा रही है। अंतिम आंकड़ा मार्कफेड, सहकारी समितियों और बैंक स्तर पर होने वाले मिलान के बाद ही स्पष्ट होगा।
अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार उपार्जन केंद्रों पर करीब 68 हजार टन धान कम मिला है। इसके अलावा संग्रहण केंद्रों में लगभग 48 हजार टन की सूखत दर्ज की गई है। इस तरह कुल प्रारंभिक कमी करीब 1.16 लाख टन बैठती है।कमी की भरपाई संबंधित सहकारी समितियों से कराए जाने की तैयारी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार वास्तविक क्षति कम रहने की संभावना है।
त्रिस्तरीय अनुबंध के तहत खरीदी किए गए धान का उठाव 30 अप्रैल तक पूरा किया जाना था। इसके बावजूद बस्तर समेत कुछ जिलों में अभी भी धान उठाया जा रहा है। ऐसे में अंतिम लेखा मिलान की प्रक्रिया पूरी होने में समय लग रहा है।प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक उपार्जन केंद्रों पर ऑनलाइन रिकॉर्ड में करीब 68,599 टन धान का उठाव अभी शेष है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 150 करोड़ रुपए बताई गई है।संग्रहण केंद्रों में रखे 16,50,386 टन धान में से 16,02,332 टन का उठाव हो चुका है। शेष मात्रा का उठाव भी प्रक्रिया में है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में करीब 1.57 लाख टन धान की कमी दर्ज की गई थी। उस समय इसकी अनुमानित कीमत 500 से 600 करोड़ रुपए बताई गई थी। इसके मुकाबले 2025-26 में प्रारंभिक तौर पर सामने आई कमी कम है।पिछले वर्ष धान खरीदी 14 नवंबर से 31 जनवरी 2025 तक चली थी। इस दौरान 25.49 लाख किसानों से रिकॉर्ड 149.25 लाख टन धान खरीदा गया था।
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी। निर्धारित अवधि के दौरान खरीदी पूरी नहीं होने पर समयसीमा बढ़ाई गई थी। किसानों से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा के अनुसार धान खरीदा गया।प्रदेश की 2,058 सहकारी समितियों के अंतर्गत 2,740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से करीब 141 लाख टन धान की खरीदी की गई। समर्थन मूल्य 3,100 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित था।
अधिकारियों के मुताबिक समितियों को जितनी मात्रा में धान खरीदना होता है, उतनी ही मात्रा का हिसाब उन्हें जमा करना होता है। फिलहाल उठाव जारी होने के कारण प्रारंभिक कमी को अंतिम नुकसान मानना जल्दबाजी होगी।मार्कफेड, सहकारी समितियों और बैंक स्तर पर पूरा मिलान होने के बाद ही वास्तविक क्षति का आंकड़ा सामने आएगा। सहकारी समितियों को मिलने वाले कमीशन से निर्धारित प्रक्रिया के तहत कमी की भरपाई किए जाने की व्यवस्था है।