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Preparations underway to address faculty shortages in new medical colleges... recruitment process set to gain momentum.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस साल शुरू होने जा रहे पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए भर्ती व्यवस्था में बदलाव की तैयारी है। दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, जशपुर, कबीरधाम और जांजगीर में शुरू होने वाले मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति मध्यप्रदेश में लागू व्यवस्था की तर्ज पर किए जाने की तैयारी है।राज्य सरकार ने इन कॉलेजों में नियमित और सीधी भर्ती की अनुमति देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसका उद्देश्य लंबे समय से बनी चिकित्सा शिक्षकों की कमी को जल्द दूर करना और नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन में आने वाली अड़चनों को कम करना है।
मध्यप्रदेश में लागू व्यवस्था के अनुसार मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता और संबंधित अस्पताल के अधीक्षक को फैकल्टी की कमी पूरी करने के लिए सीधे भर्ती करने का अधिकार दिया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है।इस व्यवस्था के तहत कॉलेज स्तर पर रिक्त पदों के लिए आवेदन मंगाने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी स्थानीय स्तर पर तय की जा सकती है। इससे राज्य स्तर की लंबी भर्ती प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी कम होने की उम्मीद है।
पांचों नए मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में बड़ी संख्या में चिकित्सा शिक्षकों की आवश्यकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक सहित विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। संबंधित अस्पतालों में करीब 330 पदों पर सीधी भर्ती किए जाने की भी तैयारी है।इन पदों पर नियुक्तियां होने के बाद नए मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक और चिकित्सकीय व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
दंतेवाड़ा, मनेंद्रगढ़, जशपुर, कबीरधाम और जांजगीर मेडिकल कॉलेजों के लिए चिकित्सा शिक्षकों की उपलब्धता राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है। फैकल्टी जुटाने के लिए पहले भी अलग-अलग स्तर पर प्रयास किए गए, लेकिन अपेक्षित संख्या में चिकित्सक और शिक्षक उपलब्ध नहीं हो सके।इसी समस्या को देखते हुए अब सीधी और नियमित भर्ती का विकल्प अपनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि कॉलेज स्तर पर भर्ती की सुविधा मिलने से रिक्त पदों को तेजी से भरा जा सकेगा।
नई भर्ती व्यवस्था तैयार करने से पहले मध्यप्रदेश में लागू मॉडल का अध्ययन किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस व्यवस्था को छत्तीसगढ़ में लागू करने को लेकर मध्यप्रदेश से जुड़े अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर चर्चा भी हुई है।मध्यप्रदेश के मॉडल में स्थानीय स्तर पर भर्ती की सुविधा को चिकित्सा शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रभावी उपाय के तौर पर देखा जाता है। छत्तीसगढ़ में भी इसी व्यवस्था के जरिए नए मेडिकल कॉलेजों को जरूरी फैकल्टी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
पांचों मेडिकल कॉलेजों में समय पर पर्याप्त चिकित्सा शिक्षक उपलब्ध होना शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अस्पतालों के संचालन के लिए भी जरूरी है। भर्ती प्रक्रिया तेज होने से नए संस्थानों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रूप से शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।