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Anant Nag had set out to distribute his sister's wedding invitations when he received a life-changing offer; later, when he collapsed on a train, a stranger a doctor saved his life.
मुंबई। कन्नड़ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। करीब पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया और 300 से अधिक फिल्मों का हिस्सा रहे। अभिनय की दुनिया में उनका पहुंचना भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बहन की शादी के कार्ड बांटने निकले अनंत नाग को रास्ते में एक ऐसा प्रस्ताव मिला, जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी।
अनंत नाग का जन्म कर्नाटक में हुआ और उनका बचपन अनुशासन के माहौल में बीता। पढ़ाई के लिए उनके पिता ने नौवीं कक्षा के दौरान उन्हें कर्नाटक से मुंबई भेज दिया था।साल 1967 में अनंत अपनी बड़ी बहन श्यामला की शादी के कार्ड लेकर परिचितों के घर जा रहे थे। इसी दौरान कन्नड़ और कोंकणी रंगमंच से जुड़े प्रभाकर मुदूर और व्यंकटराव तालगेरी की नजर उन पर पड़ी। दोनों ने अनंत को रोककर नाटक में काम करने का प्रस्ताव दिया।अनंत ने यह मौका स्वीकार किया और यहीं से उनके अभिनय सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद रंगमंच से होते हुए उन्होंने फिल्मों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
अभिनय से पहले अनंत नाग सेना में जाने की इच्छा रखते थे। 1962 और 1965 के युद्धों से प्रभावित होकर उन्होंने सेना में भर्ती होने की कोशिश भी की थी। इसके लिए वह चयन प्रक्रिया में शामिल होने कैंप तक पहुंचे, लेकिन बाईं आंख में कमजोरी के कारण सेना और वायुसेना में उनका चयन नहीं हो सका।इसके बाद उनका रुझान रंगमंच की ओर बढ़ा और अभिनय धीरे-धीरे उनके जीवन का प्रमुख हिस्सा बन गया।
अनंत नाग का बचपन बेहद अनुशासित माहौल में बीता। उनके पिता सदानंद रात में उन्हें बैठाकर भगवद्गीता के श्लोक याद करवाते थे। अनंत को डर रहता था कि यदि रात में श्लोक सुनाते समय वह अटक गए तो उन्हें डांट या मार पड़ सकती है।इसी डर के कारण वह दिन में ही श्लोक अच्छी तरह याद कर लेते थे। आगे चलकर यही आदत उनके व्यक्तित्व में अनुशासन का हिस्सा बन गई।
साल 1974 में अनंत नाग अपनी तीसरी फिल्म हंसगीते की शूटिंग के लिए मुंबई से बेंगलुरु जा रहे थे। यात्रा के दौरान उन्हें टाइफाइड हो गया और हालत बिगड़ने पर वह ट्रेन में ही बेहोश हो गए।उस समय अनंत नाग आज की तरह चर्चित अभिनेता नहीं थे। ट्रेन में मौजूद डॉक्टर देवदत्त ने उनकी हालत देखी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। उपचार के बाद डॉक्टर ने उन्हें अपने घर ले जाकर करीब 15 दिनों तक उनकी देखभाल की।बाद में जब डॉक्टर ने अनंत नाग की फिल्म देखी तो वह उनके अभिनय के प्रशंसक बन गए। एक अनजान यात्री के रूप में हुई यह मुलाकात आगे चलकर एक यादगार रिश्ते में बदल गई।
करीब पांच दशक से अधिक समय तक भारतीय सिनेमा में योगदान देने वाले अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 के लिए चुना गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से इसकी घोषणा की गई थी। उन्हें 22 सितंबर को गुजरात के केवड़िया में आयोजित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित किया जाएगा।अनंत नाग ने कन्नड़ सिनेमा के साथ हिंदी और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया है। अभिनय के अलावा वह राजनीति में भी सक्रिय रहे और कर्नाटक में जेएच पटेल सरकार के दौरान मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।पुरस्कार की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनंत नाग को बधाई दी। उन्होंने अभिनेता के लंबे करियर, सहज अभिनय और भारतीय सिनेमा, खासकर कन्नड़ फिल्म जगत में उनके योगदान की सराहना की।इस तरह बहन की शादी के कार्ड बांटते हुए अचानक मिला रंगमंच का वह पहला मौका अनंत नाग के जीवन का ऐसा मोड़ बना, जिसने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक तक पहुंचा दिया।