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Army eliminates Lashkar commander Hashim Musa, accused in the Pahalgam attack; he carried a reward of ₹20 lakh.
नई दिल्ली। ऑपरेशन कोराग में बड़ी कामयाबी मिली है। जम्मू-कश्मीर के खानसाहिब इलाके के पालमेदान मुगपथरी जंगल में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने मूसा के मारे जाने की पुष्टि की है। तलाशी अभियान के दौरान उसका शव और युद्ध जैसी सामग्री बरामद की गई है। इलाके में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है।
सेना के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने यूसमर्ग के कोराग इलाके में संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया था। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को संदिग्ध गतिविधि नजर आई। इसके बाद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की।
मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। बाद में तलाशी के दौरान उसकी पहचान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई।
श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने बताया कि बुधवार सुबह पालमेदान इलाके में चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान हाशिम मूसा का शव बरामद किया गया। उसके पास से युद्ध में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी मिली है।
सेना ने इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन कोराग' नाम दिया है। सुरक्षाबल फिलहाल इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं, ताकि किसी अन्य आतंकी या हथियारों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।
हाशिम मूसा का नाम जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों में शामिल था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी में पाकिस्तानी नागरिकों और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों आदिल हुसैन ठोकर, अली भाई और हाशिम मूसा के बारे में सूचना देने की अपील की गई थी।
2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हाशिम मूसा का नाम मुख्य संदिग्धों में सामने आया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा समेत कई आतंकियों की तलाश तेज की थी।
हालांकि, बाद की जांच में यह सामने आया कि मूसा पहलगाम हमले में सीधे तौर पर शामिल नहीं था। इसके बावजूद वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर बना रहा।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, हाशिम मूसा पाकिस्तान की स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में पैरा-कमांडो के तौर पर काम कर चुका था। इसके बाद वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में सक्रिय रहा।
सूत्रों के मुताबिक, मूसा ने 2022 में घुसपैठ के जरिए कश्मीर घाटी में प्रवेश किया था। इसके बाद वह आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने और युवाओं की भर्ती में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
सुरक्षा एजेंसियों की नजर 2022 से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के चार आतंकियों के एक समूह पर थी। इसमें जुनैद रमजान अहमद, अबू ताल्हा, यासिर और हाशिम मूसा शामिल थे। जुनैद रमजान अहमद दिसंबर 2024 में मारा गया। अबू ताल्हा अप्रैल 2025 में मारा गया। यासिर सुलेमान और हाशिम मूसा सितंबर 2026 में मारे गए।
जुनैद के मोबाइल फोन से इन चारों की एक तस्वीर भी सुरक्षा बलों को मिली थी। इसके बाद एजेंसियों को उनके नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले में सात आरोपियों के खिलाफ 1,597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके दूसरे नाम द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को भी आरोपी बनाया गया था। हाशिम मूसा के मारे जाने के बाद अब सुरक्षा एजेंसियां उसके नेटवर्क, संपर्कों और जम्मू-कश्मीर में उसकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही हैं।