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NSA detention cannot be sustained on the basis of an alleged confession made in police custody... Supreme Court grants major relief to Mulla Afroz.
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत की गई निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारी के सामने दिए गए कथित कबूलनामे को अकेले निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च भी लगाया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को स्वतंत्र और ठोस सामग्री के बिना किसी व्यक्ति की निवारक हिरासत के लिए जरूरी संतुष्टि का आधार नहीं बनाया जा सकता। पीठ ने यह भी कहा कि हिरासत का फैसला लेते समय संबंधित परिस्थितियों और उपलब्ध अन्य सामग्री पर भी विचार किया जाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज के खिलाफ जारी निवारक हिरासत के आदेश को रद्द करने के साथ ही उस आदेश की पुष्टि करने वाले फैसले और इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को भी निरस्त कर दिया। यह मामला 2024 में संभल में हुई हिंसा से जुड़ा है, जो शाही जामा मस्जिद के अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के बाद हुई थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।
मुल्ला अफरोज के खिलाफ 13 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया गया था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने पहले भी इस बात पर सवाल उठाया था कि पुलिस हिरासत में कथित तौर पर दिए गए कबूलनामे के आधार पर निवारक हिरासत का आदेश कैसे कायम रखा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने हिरासत के फैसले का बचाव करते हुए दलील दी थी कि उपलब्ध सामग्री से यह आशंका सामने आती है कि अफरोज दोबारा हिंसा कर सकते हैं या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सरकार का कहना था कि ऐसी संभावना दिखाने वाली सामग्री निवारक हिरासत के लिए पर्याप्त हो सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री और प्रक्रिया को पर्याप्त नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट ने निवारक हिरासत को गैरकानूनी ठहराते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च लगाया है। अदालत का यह फैसला NSA के तहत की गई हिरासत से संबंधित था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अफरोज के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं, इसलिए NSA हिरासत रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि अन्य मामलों में चल रही कानूनी प्रक्रिया अपने आप खत्म हो गई।
इस मामले में अदालत के फैसले का प्रमुख बिंदु यह है कि निवारक हिरासत जैसी कार्रवाई के लिए केवल पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे पर निर्भर नहीं किया जा सकता। हिरासत का आदेश पर्याप्त और प्रासंगिक सामग्री पर आधारित होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश में इसी आधार पर मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत को रद्द किया गया है।