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Attempt to open a shop in the basement backfires; PG operator arrested.
नई दिल्ली। निकेतन हादसे के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीजी संचालक सुधांशु लवानीया को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में सामने आया है कि इमारत के बेसमेंट में दुकान निकालने के लिए निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इसी दौरान भवन की एक दीवार कमजोर हुई और पूरा ढांचा ढह गया। हादसे में पांच छात्रों और दो मजदूरों की जान चली गई थी।पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि पीजी संचालक ने बेसमेंट के ग्राउंड फ्लोर को दुकान के रूप में विकसित करने का काम ठेकेदार को सौंपा था। यहां करीब तीन ट्रक मलबा जमा हो गया था और काम के बदले ठेकेदार को रोजाना करीब 2800 रुपये दिए जा रहे थे।
पुलिस के अनुसार सुधांशु चार मंजिला इमारत को पीजी के तौर पर संचालित कर रहा था। इसके लिए वह मकान को करीब 1.05 लाख रुपये प्रतिमाह किराये पर लेकर छात्रों को आवास की सुविधा दे रहा था। हादसे के बाद पुलिस ने मामले में मकान मालिक और अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी।डीसीपी दक्षिण-पश्चिमी जिला अमित गोयल के मुताबिक पूछताछ में ठेकेदार ने बताया कि घटना से करीब दस दिन पहले पीजी संचालक ने उसे बेसमेंट के ग्राउंड फ्लोर को दुकान के लिए तैयार करने का काम दिया था।
मामले में पुलिस ने मकान मालिक महेश गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पीजी संचालक सुधांशु तथा श्रमिक ठेकेदार मनोज को भी आरोपी बनाया गया है।पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के लिए तीन दिन की रिमांड मांगी थी। इसके बाद मकान मालिक और ठेकेदार मनोज की रिमांड पूरी होने पर उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट कौतुक भारद्वाज की अदालत में पेश किया गया। वहीं पीजी संचालक सुधांशु की गिरफ्तारी बुधवार को की गई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बेसमेंट में निर्माण कार्य के दौरान किन सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई और कमजोर हुई दीवार को हटाने या बदलने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी। हादसे में हुई मौतों को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया है और निर्माण कार्य से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।