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Railway network to gain new momentum; train capacity to increase on seven rail corridors.
नई दिल्ली। देश के व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या और माल परिवहन के दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं के पूरा होने के बाद करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे सात प्रमुख रेल कॉरिडोर पर परिचालन क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों के साथ माल ढुलाई को भी गति मिलेगी।
रेलवे के सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ते हैं। इन मार्गों पर वर्तमान में कुल रेल यातायात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा संचालित होता है। इनमें दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे महत्वपूर्ण मार्ग शामिल हैं।
सरकार ने आठ राज्यों में मल्टीट्रैकिंग से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 20,804 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। योजनाओं के तहत करीब 1196 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक तैयार किए जाएंगे। इससे व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों के संचालन को व्यवस्थित करने के साथ यात्रियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि माल परिवहन की क्षमता को मजबूत करना और रेल नेटवर्क पर आवागमन को अधिक सुचारु बनाना भी है।
मल्टीट्रैकिंग योजना में छत्तीसगढ़ के साथ मध्य प्रदेश, बंगाल, झारखंड और ओडिशा से जुड़ी तीन प्रमुख परियोजनाएं भी शामिल हैं। इनमें खड़गपुर-बांधाडीह चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड विस्तार तथा बिलासपुर क्षेत्र से जुड़ा रेल मार्ग शामिल है।
बिलासपुर के उसलापुर-पेंड्रा रोड रेलखंड में तीसरी और कटनी-पेंड्रा रोड में चौथी लाइन का प्रावधान किया गया है। कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और इस्पात जैसे खनिज एवं औद्योगिक माल के परिवहन की दृष्टि से ये रेलखंड बेहद अहम माने जाते हैं।
परियोजनाओं के वर्ष 2029-30 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। इनके माध्यम से करीब 656 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क विकसित होगा। इससे 14 जिलों के लगभग 4,790 गांवों और करीब 56 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है।
रेलवे के बुनियादी ढांचे में यह विस्तार यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध कराने के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। केंद्र सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से यात्रा का समय घटाने, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और देश के प्रमुख रेल मार्गों पर परिचालन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।