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Ayodhya Ram Mandir offering theft case: Major revelations in SIT report
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर की चढ़ावा प्रबंधन व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, वित्तीय निगरानी और नियुक्तियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच टीम ने मामले में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश करने के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का सुझाव भी दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, लगभग 20 से 21 पन्नों की इस रिपोर्ट में 150 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के अधिकारी, कर्मचारी, बैंक प्रतिनिधि, सुरक्षा कर्मी और स्थानीय लोगों से पूछताछ शामिल है। रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी गई है, जो ट्रस्ट में राज्य सरकार के पदेन सदस्य भी हैं।
कोषाध्यक्ष की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला तब सामने आया जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद प्रसाद ने मंदिर में चढ़ावे की संगठित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि चढ़ावे की गिनती, बैंक में जमा करने और उसकी निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। शिकायत के बाद राज्य सरकार ने सात सदस्यीय SIT का गठन कर जांच शुरू कराई थी।
रिपोर्ट में क्या-क्या सामने आया?
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि चढ़ावा राशि को मंदिर से बैंक और गिनती केंद्र तक ले जाने की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे का रिकॉर्ड प्रबंधन भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि चढ़ावे की गिनती और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी। कई मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में ट्रस्ट के ऑडिट और निगरानी तंत्र को भी कमजोर बताया गया है।
नियुक्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल
रिपोर्ट में ट्रस्ट और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में हुई कुछ नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच टीम का मानना है कि कुछ मामलों में तय प्रक्रिया और योग्यता मानकों की अनदेखी की गई। इसके अलावा मंदिर प्रशासन और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी बताई गई है।
FIR और सख्त कार्रवाई की सिफारिश
SIT ने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
साथ ही पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे का विशेष ऑडिट कराने, वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच करवाने और दान प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का सुझाव दिया गया है।
ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव
जांच रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मंदिर का CEO नियुक्त करने तथा वित्तीय और प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में मंदिर की व्यवस्था से जुड़े करीब 14 लोगों की भूमिका की जांच का भी उल्लेख है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं और जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाना चाहिए। वहीं सरकार का कहना है कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों और चढ़ावा प्रबंधन की कोर्ट मॉनिटरिंग में जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल श्रद्धालुओं के विश्वास को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
10-15 दिन में आ सकती है अंतिम रिपोर्ट
SIT ने फिलहाल अपनी प्रारंभिक और गोपनीय रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। बताया जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट 10 से 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जा सकती है। इसके बाद सरकार आगे की कार्रवाई, एफआईआर और प्रशासनिक सुधारों पर फैसला लेगी।
मामले ने देशभर के श्रद्धालुओं और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हुई है।