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Ayushman Scheme: Allegations of recovery despite card, serious questions on private hospital
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयुष्मान योजना के नियमों के उल्लंघन का बड़ा मामला सामने आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज का प्रावधान होने के बावजूद एक निजी अस्पताल पर मरीजों से मोटी रकम वसूलने के आरोप लगे हैं।
शिकायतों के बावजूद जारी है अनियमितता
शहर के एनएचएमएमआई (नारायणा) अस्पताल के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड दिखाने के बाद भी मरीजों और उनके परिजनों से भर्ती, इलाज और अन्य सेवाओं के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं। कई पीड़ितों ने हेल्पलाइन 104 पर शिकायत दर्ज कराई, जबकि कुछ ने सीधे स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, अब तक कम से कम पांच मामलों में अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है और जांच जारी है। बीते तीन वर्षों में 10 से ज्यादा शिकायतें सामने आने के बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं होने से मरीजों में नाराजगी है।
8 लाख का बिल, आयुष्मान सुविधा से इनकार
राजनांदगांव निवासी रमेश परहाते को फरवरी 2024 में दिल का दौरा पड़ा। उन्हें एनएचएमएमआई अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 14 दिन तक इलाज चला। अस्पताल ने सर्जरी, जांच और रूम चार्ज के नाम पर करीब 8 लाख रुपये का बिल थमा दिया।
जब परिजनों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने इसे मानने से इनकार कर दिया। मजबूरी में पूरी रकम चुकानी पड़ी। बाद में शिकायत पर 13 अप्रैल 2024 को अस्पताल को नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसके बाद ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
कार्ड दिखाया तो इलाज से किया इनकार
एक अन्य मामले में जुलाई 2025 में खुमान साहू को ब्रेन स्ट्रोक आने पर अस्पताल ले जाया गया। भर्ती के समय 10 हजार रुपये जमा कराए गए। आयुष्मान कार्ड दिखाने पर इलाज से इनकार कर दिया गया। कुछ घंटों के उपचार के बाद मरीज को 24 हजार रुपये का बिल थमाकर डिस्चार्ज कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि पहले आयुष्मान कार्यालय से बात कराने पर अस्पताल ने सहमति जताई, लेकिन बाद में बेड नहीं होने का हवाला देकर मरीज को दूसरे अस्पताल भेज दिया।
नकद भी लिया, कार्ड से भी कटौती
पुरानी बस्ती निवासी धीरज शर्मा ने आरोप लगाया कि उनके परिजन की डायलिसिस शुरुआत में आयुष्मान योजना के तहत की गई। बाद में हर सत्र के लिए 3 हजार रुपये मांगे जाने लगे। नकद भुगतान के बावजूद आयुष्मान कार्ड से भी राशि काट ली गई। शिकायत के बाद भी समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने अस्पताल बदल दिया।
विभागीय कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं और जांच जारी है। एक मामले में 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद कड़ी कार्रवाई का अभाव सवाल खड़े करता है।
सीएमएचओ डॉ मिथिलेश चौधरी ने कहा कि गंभीर शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
योजना की साख पर असर, सख्ती की जरूरत
आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। लेकिन इस तरह के मामलों से योजना की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और निगरानी जरूरी है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को उनका अधिकार मिल सके।