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Chhattisgarh: Legal challenge on Advocates Association elections 2026-28, petition in High Court
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जिला अधिवक्ता संघ के चुनाव 2026-28 को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए अधिवक्ता शमीम रहमान ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में चुनावी अधिसूचना और मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई है।
आरक्षण व्यवस्था पर उठे संवैधानिक सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि कुल 18 पदों में से 9 पद पुरुषों के लिए आरक्षित किए गए हैं, जो संविधान के समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। यह व्यवस्था अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन बताई गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संविधान में महिलाओं के हित में विशेष प्रावधान हैं, लेकिन पुरुषों के लिए आरक्षण का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है।
प्रक्रिया में जल्दबाजी के आरोप
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ता संघ की मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल 10 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद 24 मार्च को अचानक चुनावी अधिसूचना और नियम जारी कर दिए गए। आरोप है कि आपत्तियां दर्ज कराने और अपील करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नियुक्ति और सिक्योरिटी डिपाजिट पर आपत्ति
अधिवक्ता शमीम रहमान ने मुख्य चुनाव अधिकारी और अपील समिति की नियुक्ति को मनमाना बताया है। इसके साथ ही चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित भारी सिक्योरिटी डिपाजिट को भी चुनौती दी गई है। उनका कहना है कि इस संबंध में 24 मार्च को विस्तृत अभ्यावेदन दिया गया था, लेकिन उस पर कोई विचार नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें न्यायालय का रुख करना पड़ा।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद
इस पूरे विवाद में महिलाओं की भागीदारी को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं:
अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं
उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव और सांस्कृतिक सचिव जैसे पद पुरुषों के लिए आरक्षित
आरक्षण तय करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं
याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना आमसभा की सहमति के नियमों में बदलाव कर चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया और चुनावी प्रक्रिया में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
चुनावी सरगर्मी तेज, 17 अप्रैल को मतदान
विवाद के बीच चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। मतदान 17 अप्रैल को प्रस्तावित है, जिससे पहले इस कानूनी चुनौती ने चुनावी समीकरण को और जटिल बना दिया है।
अधिकारियों का रुख: कोर्ट के फैसले का इंतजार
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राम नारायण व्यास ने कहा कि यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। हाईकोर्ट का जो भी फैसला आएगा, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आगे क्या होगा
अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न केवल चुनाव की दिशा तय करेगा, बल्कि अधिवक्ता संघ की चुनावी प्रक्रिया और नियमों पर भी बड़ा असर डाल सकता है।