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BJP attacks Congress over Vande Mataram; raises questions regarding a Goa event.
नई दिल्ली। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी विवाद तेज हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के प्रति कथित तौर पर सम्मान की कमी दिखाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रवैया राष्ट्रीय प्रतीकों और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास के प्रति उसके दृष्टिकोण को दर्शाता है। रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम के बाद पार्टी ने गोवा में भी वंदे मातरम को लेकर विवाद खडा किया। उनका कहना है कि 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रगीत गाए जाने के कार्यक्रम के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी रही, लेकिन गोवा में आयोजित कार्यक्रम में मंच से जुडी व्यवस्था को लेकर सवाल उठे।
भाजपा नेता ने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत और स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे प्रतीकों का सम्मान नहीं करता, तो उसे अपने राजनीतिक इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।उन्होंने वंदे मातरम को भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से जुडा महत्वपूर्ण गीत बताते हुए कांग्रेस पर इतिहास के साथ समझौता करने का आरोप लगाया। रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि वर्ष 1936-37 के दौर में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को लेकर अलग रुख अपनाया था।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी नेताओं और स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे महापुरुषों ने जिस वंदे मातरम को गाया, कांग्रेस भी उसी परंपरा का पालन करती रही है।खरगे ने भाजपा पर ऐतिहासिक तथ्यों को सही संदर्भ में नहीं रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी राष्ट्रगीत का अपमान नहीं किया और इस विषय पर लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित हैं।
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले भी राजनीतिक मतभेद सामने आते रहे हैं। इस बार गोवा में आयोजित कार्यक्रम को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है, जबकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की राजनीतिक व्याख्या बताया है।भाजपा का कहना है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक विवाद से ऊपर रखा जाना चाहिए। वहीं कांग्रेस का तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और उसके दस्तावेजों को पूरे संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। इस विवाद के बीच वंदे मातरम एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। दोनों दलों के नेताओं के बयानों से साफ है कि राष्ट्रगीत से जुडा यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी सियासी चर्चा का विषय बना रह सकता है।