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BMC Elections 2026: Thackeray fort collapses after 3 decades, clears way for first BJP mayor in Mumbai
BMC Election Results 2026: महाराष्ट्र के 29 नगर निगम चुनावों के नतीजों में बीजेपी गठबंधन ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 25 नगर निगमों में जीत दर्ज की है। इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की रही, जहां करीब तीन दशक बाद ठाकरे परिवार का दबदबा खत्म हो गया। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एकजुट होने के बावजूद ‘ठाकरे किला’ ढह गया और पहली बार मुंबई में बीजेपी का मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया है।
नगर निगम चुनाव के कुल नतीजे
15 जनवरी को हुए मतदान के बाद 16 जनवरी को नतीजे सामने आए। महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों में से रात 12 बजे तक 2,833 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे। बीजेपी ने करीब 1,400 सीटों पर जीत दर्ज कर खुद को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित किया। वहीं, बीजेपी की अगुवाई वाला महायुति गठबंधन लगभग 1,934 सीटें जीतता नजर आया। नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी-चिंचवड और नासिक समेत 25 नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन को बढ़त मिली।
BMC चुनाव परिणाम: पहली बार BJP बहुमत के करीब
मुंबई के BMC चुनाव में कुल 227 सीटों में से बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें बीजेपी–शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन ने हासिल कर लीं। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें जीतीं। 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला BMC चुनाव था। इस हार के साथ उद्धव ठाकरे को एक बार फिर बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
ठाकरे ब्रदर्स के लिए क्यों अहम था BMC चुनाव
BMC चुनाव ठाकरे ब्रदर्स के लिए साख और अस्तित्व की लड़ाई बन गया था। शिवसेना के दो गुटों में बंटने के बाद उद्धव ठाकरे ने करीब 20 साल बाद अपने चचेरे भाई राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया और ‘मराठी मानुस’ के मुद्दे को केंद्र में रखा। दोनों नेताओं ने इस चुनाव को “मराठियों का आखिरी चुनाव” तक बताया। BMC हमेशा से ठाकरे परिवार की राजनीतिक जमीन रही है और 1995 से 2017 तक लगातार शिवसेना का ही मेयर रहा है।
3 दशक बाद कैसे ढहा ‘ठाकरे किला’
इस बार कई वजहों से ठाकरे परिवार का गढ़ ढह गया। शिवसेना के दो टुकड़े होने से संगठन कमजोर पड़ा और जमीनी पकड़ खत्म हुई। 2019 में बीजेपी से अलग होकर कांग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाने का फैसला भी लंबे समय में नुकसानदेह साबित हुआ। 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उद्धव गुट का कमजोर प्रदर्शन इसका संकेत पहले ही दे चुका था।
उद्धव–राज गठबंधन क्यों नहीं चला
उद्धव और राज ठाकरे का एक साथ आना भी चुनावी सफलता नहीं दिला सका। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की स्थिति पहले से ही कमजोर थी और उसका सीमित वोट बैंक इस गठबंधन को मजबूती नहीं दे सका। इसके उलट, राज ठाकरे की एंटी-नॉन मराठी और एंटी-मुस्लिम छवि ने कुछ वर्गों में नकारात्मक असर डाला। कांग्रेस से अलग होने का फैसला भी उद्धव ठाकरे के लिए नुकसानदेह साबित हुआ।
BJP के लिए BMC जीत क्यों है खास
बीजेपी के लिए BMC की जीत कई मायनों में अहम है। BMC सिर्फ मुंबई की नगर पालिका नहीं, बल्कि देश की आर्थिक राजधानी का प्रशासनिक और विकासात्मक नियंत्रण भी इसके हाथ में होता है। इसके अलावा, इस जीत से बीजेपी ने खुद को महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में फिर से स्थापित कर लिया है। महायुति गठबंधन में अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका भी बीजेपी के पास साफ तौर पर आ गई है।
मराठी और महिला वोटर्स का रुझान
इन नतीजों से यह भी संकेत मिला है कि बीजेपी की हिंदुत्व और विकास की राजनीति को मराठी मतदाताओं का समर्थन मिला है। महिला वोटर्स का झुकाव भी बीजेपी की तरफ रहा, जिसमें ‘लाडकी बहिण योजना’ जैसी योजनाओं की अहम भूमिका मानी जा रही है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़
कुल मिलाकर, BMC चुनाव 2026 महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है। तीन दशक बाद ठाकरे परिवार का गढ़ ढहना और बीजेपी का मुंबई में परचम लहराना आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।