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Bailadila iron ore scam: 2 bogus boxes added to rack of 57 wagons, minerals worth crores; Question raised on investigation
दंतेवाड़ा। बस्तर के बैलाडीला क्षेत्र से लौह अयस्क के अवैध परिवहन को लेकर एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने एनएमडीसी, भारतीय रेलवे और खनिज परिवहन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विजिलेंस की गोपनीय जांच में खुलासा हुआ है कि बैलाडीला से रवाना हुई 57 वैगनों की स्वीकृत मालगाड़ी में कथित तौर पर दो अतिरिक्त वैगन जोड़कर करोड़ों रुपये मूल्य का लौह अयस्क परिवहन किया गया। हैरानी की बात यह है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई।
सूत्रों के अनुसार जांच में पाया गया कि निर्धारित 57 वैगनों वाली रैक में फर्जी तरीके से दो अतिरिक्त वैगन शामिल किए गए थे। इन वैगनों में बड़ी मात्रा में लौह अयस्क लोड कर सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज दिया गया। मामला उजागर होने के बाद संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया और तत्काल कार्रवाई करते हुए एक कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इतने बड़े स्तर की अनियमितता में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
बैलाडीला से निकलने वाली लौह अयस्क रैक का अंतिम वजन भांसी स्थित डिजिटल वेटमेंट सिस्टम के जरिए सत्यापित किया जाता है। यही प्रणाली सुरक्षा और निगरानी की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 57 वैगनों के अनुमोदित वजन के साथ जुड़े दो अतिरिक्त वैगनों का अतिरिक्त भार सिस्टम ने क्यों नहीं पकड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी गड़बड़ी बिना तकनीकी छेड़छाड़ या सिस्टम में हस्तक्षेप के संभव नहीं है। यदि अतिरिक्त वैगनों में लौह अयस्क भरा गया था तो ओवरलोडिंग का संकेत तत्काल मिलना चाहिए था।
मामले के सामने आने के कई महीने बाद भी रेलवे की अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि उच्च अधिकारियों की भूमिका पर पर्दा डालने के लिए कार्रवाई को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रखने की कोशिश की जा रही है।
जानकारों का कहना है कि किसी भी मालगाड़ी की संरचना, वैगनों की संख्या, लोडिंग रिकॉर्ड, डिस्पैच दस्तावेज और वजन सत्यापन की कई स्तरीय प्रक्रिया होती है। ऐसे में दो अतिरिक्त वैगनों का शामिल होना किसी एक कर्मचारी की गलती नहीं माना जा सकता।
नियमों के अनुसार मालगाड़ी रवाना होने से पहले कई विभागीय स्तरों पर जांच और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लोडिंग प्लांट के अधिकारी, कमर्शियल सेक्शन, रेलवे प्रबंधन और एनएमडीसी के जिम्मेदार अधिकारी उस समय क्या कर रहे थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि करोड़ों रुपये के लौह अयस्क से भरे दो अतिरिक्त वैगनों का रिकॉर्ड तैयार होना, उन्हें ट्रेन में शामिल करना और मुख्य रेल मार्ग पर संचालित करना बिना व्यापक मिलीभगत के संभव नहीं लगता।
जांच के दौरान खनिज परिवहन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठे हैं। जानकारी के अनुसार बैलाडीला क्षेत्र में रॉयल्टी बुक और ट्रांजिट पास की प्रक्रिया लंबे समय से एनएमडीसी परिसर से संचालित होती रही है। जबकि नियमानुसार इनका नियंत्रण और सत्यापन खनिज विभाग के अधीन होना चाहिए।
आरोप है कि खनिज विभाग के कर्मचारी भी एनएमडीसी परिसर के भीतर बैठकर ट्रांजिट पास जारी करते हैं, जिससे निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित होती है।
बैलाडीला क्षेत्र पहले भी अवैध खनन, ओवरलोडिंग, ट्रकों के जरिए अवैध परिवहन और खनिज भंडारण को लेकर विवादों में रहा है। ताजा मामला सामने आने के बाद पूरे खनिज परिवहन तंत्र की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।