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Political row in Chhattisgarh over the de-listing issue; CM Sai says Congress is spreading confusion by ignoring facts.
रायपुर। अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े डी-लिस्टिंग मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। इस विषय पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के आरोपों को भ्रामक बताते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों पर बयान देने से पहले तथ्य और कानूनी स्थिति की पूरी जानकारी होना जरूरी है।
सीएम ने कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस बिना पूरी जानकारी के जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि डी-लिस्टिंग जैसे गंभीर विषय पर राजनीति करने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उनके मुताबिक, आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर लोगों को गुमराह करना उचित नहीं है।
डी-लिस्टिंग को लेकर क्या है विवाद
हाल ही में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध करते हुए आरोप लगाया था कि इसके जरिए आदिवासी समाज की संख्या घटाने और जल, जंगल तथा जमीन पर अधिकार कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इस विषय को राजनीतिक रंग देना सही नहीं है।
जनजाति सुरक्षा मंच ने आंदोलन की चेतावनी दी
इस बीच जनजाति सुरक्षा मंच ने भी डी-लिस्टिंग के मुद्दे को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। संगठन का कहना है कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
दिल्ली सम्मेलन के बाद बढ़ा दबाव
जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मंत्री गणेशराम भगत ने अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली में आयोजित बड़े जनजातीय सम्मेलन के बाद समाज की भावनाओं से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अवगत कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है।
मिशनरियों पर लगाया सुनियोजित विरोध का आरोप
गणेशराम भगत ने कहा कि डी-लिस्टिंग की मांग का विरोध कुछ संगठित समूहों और मिशनरियों द्वारा किया जा रहा है। उनका आरोप है कि आदिवासी कल्याण की योजनाओं का बड़ा हिस्सा उन लोगों तक पहुंच रहा है, जो धर्मांतरण कर चुके हैं, जबकि मूल आदिवासी समाज अपेक्षित लाभ से वंचित रह जाता है।
आरक्षण व्यवस्था पर फिर छिड़ी नई बहस
डी-लिस्टिंग के मुद्दे ने एक बार फिर धर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। आने वाले समय में यह विषय प्रदेश की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का केंद्र बन सकता है।