

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Behind a facade of beauty, innocence, and respectable appearances... a dangerous cannabis smuggling network is spreading via trains.
रायपुर। राजधानी और आसपास के इलाकों में पुलिस की सख्ती बढ़ने के बाद गांजा तस्करों ने अपना पूरा नेटवर्क बदल दिया है। अब वे जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए ऐसे लोगों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिन पर सामान्य तौर पर किसी को शक नहीं होता। नाबालिग बच्चों, युवतियों, महिलाओं, शिक्षकों और खिलाड़ियों तक को इस अवैध कारोबार का हिस्सा बनाया जा रहा है।ओडिशा से देश के अलग-अलग राज्यों तक गांजा पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ पहले से ही अहम ट्रांजिट प्वाइंट माना जाता है। अब तस्करों ने रेलवे नेटवर्क को सबसे सुरक्षित रास्ता मान लिया है। ट्रेनों और रेलवे प्लेटफार्म के जरिए बड़े पैमाने पर गांजा भेजा जा रहा है, जिससे रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और नियमित जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक ओडिशा से महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक गांजा पहुंचाने के लिए पुरी-अहमदाबाद, समता एक्सप्रेस, विशाखापत्तनम-दुर्ग, विशाखापत्तनम-रायपुर और लिंक एक्सप्रेस विशाखापत्तनम-कोरबा जैसी ट्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तस्कर यात्रियों की भीड़ और लंबी दूरी की ट्रेनों का फायदा उठाकर पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश करते हैं।
इसी साल अप्रैल में दो नाबालिग बच्चों को ट्रेन के जरिए गांजा ले जाते हुए पकड़ा गया। जांच में खुलासा हुआ कि उनके पेट पर टेप से गांजे के पैकेट चिपकाए गए थे। मासूम बच्चों को महज 1100 से 1200 रुपये का लालच देकर इस अवैध धंधे में उतारा गया था। मामले की जांच आगे बढ़ी तो पिछले महीने पुलिस ने पूरे गिरोह के मुख्य आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया।
22 मार्च को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने रायपुर रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस के एसी कोच से दो युवतियों को गिरफ्तार किया। दोनों के सूटकेस से 24 किलो गांजा बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि युवतियां वीआईपी गेट का इस्तेमाल कर जांच से बचने की कोशिश कर रही थीं। गांजा सूटकेस में इस तरह छिपाया गया था कि किसी को आसानी से संदेह न हो।
करीब दो महीने पहले एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और गंज थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के दो अंतरराज्यीय तस्करों को रेलवे स्टेशन एक्सप्रेस-वे रोड के पास गिरफ्तार किया गया। आरोपित विवेक पाल निवासी इटावा और मंजीत पांडेय निवासी गाजियाबाद पानी टंकी के पास गांजा बेचने की तैयारी में थे। हैरानी की बात यह रही कि यह स्थान आरपीएफ थाने से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित है।
करीब पांच वर्ष पहले आरपीएफ थाने में सफाई का काम करने वाले कमलेश सोनकर और उनकी पत्नी को भी गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने यह भी संकेत दिया कि तस्कर अपने नेटवर्क में हर स्तर के लोगों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
वर्ष 2026 में रायपुर और आसपास के जिलों में गांजा तस्करी से जुड़े 70 से अधिक आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब तक 45 से ज्यादा बड़े मामले दर्ज हुए हैं। गिरफ्तार आरोपितों में छह शिक्षक, सात कलाकार, बास्केटबाल खिलाड़ी, नाबालिग बच्चे और कई युवतियां भी शामिल हैं। इससे साफ है कि तस्कर लगातार नए चेहरों का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त रमण कुमार के अनुसार नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जनवरी से अब तक 17 मामलों में 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान 196 किलो गांजा जब्त किया गया है। रेलवे परिसर और ट्रेनों में लगातार जांच अभियान जारी है।