

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Bharatmala compensation dispute escalates: 100 farmers from Dhamtari approach the EOW, demanding a probe into a multi-crore scam.
रायपुर। रायपुर-विशाखापत्तनम भारतमाला आर्थिक गलियारा परियोजना से जुड़े कथित भूमि मुआवजा घोटाले को लेकर धमतरी जिले के ग्रामीणों ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। ग्राम सिवनीकला के लगभग 100 किसान सोमवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) कार्यालय पहुंचे और विस्तृत दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।किसानों का आरोप है कि परियोजना से संबंधित गोपनीय जानकारी कुछ लोगों तक पहले ही पहुंच गई थी। इसके बाद कथित तौर पर भू-माफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से मूल खसरों को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया गया। बाद में इन टुकड़ों का नामांतरण परिवारजनों और करीबी लोगों के नाम पर कराकर अधिक मुआवजा हासिल किया गया।
19 खसरों को 88 हिस्सों में बांटने का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि 19 मूल खसरों को 88 से अधिक टुकड़ों में विभाजित कर मुआवजा गणना की प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। किसानों का कहना है कि भूमि को 500 वर्गमीटर से कम हिस्सों में बांटकर मुआवजा राशि कई गुना बढ़ा ली गई, जिससे शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति हुई।ग्रामीणों ने तत्कालीन राजस्व अधिकारियों, भू-अर्जन शाखा के कर्मचारियों, पंजीयन कार्यालय और कथित भू-माफिया की भूमिका की जांच कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही बैंक खातों और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
20 हजार की जमीन पर मिला लाखों का मुआवजा
शिकायत में टकेश्वर चंद्राकर और उनके परिवार का विशेष उल्लेख किया गया है। किसानों के अनुसार, परियोजना का आशय पत्र जारी होने के बाद जमीन का विभाजन कर उसे परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम दर्ज कराया गया।आरोप है कि मात्र 20 हजार रुपये में खरीदी गई जमीन के एवज में बाद में 18 लाख 34 हजार रुपये से अधिक का मुआवजा प्राप्त किया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि एक ही परिवार ने विभिन्न नामों का उपयोग कर करोड़ों रुपये का लाभ उठाया।
नाला स्थानांतरण के नाम पर दोबारा मुआवजा मिलने का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ खसरों को दोबारा अधिग्रहित दिखाकर "नाला री-लोकेशन" के नाम पर अतिरिक्त मुआवजा वितरित किया गया। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2019 में अधिग्रहित भूमि को बाद में नई अधिसूचना और नए अवार्ड के माध्यम से फिर शामिल किया गया।किसानों का कहना है कि जिन स्थानों को नाला स्थानांतरण क्षेत्र बताया गया, वहां वास्तविक स्थिति इससे मेल नहीं खाती। ऐसे मामलों में दोहरी भुगतान प्रक्रिया की जांच जरूरी है।
232 किसानों पर पड़ा असर
ग्रामीणों के अनुसार, पूरे मामले से करीब 232 किसान प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि भूमि विभाजन, नामांतरण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया असामान्य रूप से तेज गति से पूरी की गई, जिससे प्रशासनिक भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच
- कथित दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो
- बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल
- नामांतरण और रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच
- अतिरिक्त मुआवजा वितरण की सत्यता की जांच
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आगे और व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। भारतमाला परियोजना से जुड़े इस विवाद ने अब प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।