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Major overhaul of health services in Chhattisgarh: doctors from other states will now be able to practice; organizations have raised objections.
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय लागू किया है। नई अधिसूचना के अनुसार अब देश के किसी भी राज्य अथवा केंद्र शासित प्रदेश में विधिवत पंजीकृत चिकित्सक, परिचारिका, प्रयोगशाला तकनीशियन तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मी बिना अतिरिक्त पंजीयन के छत्तीसगढ़ में सेवा दे सकेंगे। इसके लिए उन्हें राज्य की चिकित्सा, परिचारिका या सह-चिकित्सा परिषद में पृथक पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
अब तक प्रदेश में कार्य करने के लिए स्थानीय परिषदों में पंजीयन कराना अनिवार्य था, लेकिन नए प्रावधान के बाद इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। शासन का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और संस्थानों को योग्य मानव संसाधन आसानी से मिल सकेंगे।
नर्सिंग होम अधिनियम के तहत मिली छूट
जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि नर्सिंग होम अधिनियम 2010 के अंतर्गत यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मान्यता प्राप्त परिषद में पंजीकृत है, तो वह छत्तीसगढ़ में भी चिकित्सा सेवाएं देने के लिए पात्र माना जाएगा। इस व्यवस्था का लाभ चिकित्सकों के साथ-साथ परिचारिकाओं, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भी मिलेगा।
जूनियर चिकित्सक संघ ने उठाए गंभीर प्रश्न
राज्य शासन के इस निर्णय के बाद जूनियर चिकित्सक संघ और कई अन्य स्वास्थ्य संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया प्रतीत होता है। संघ का आरोप है कि प्रदेश में स्थापित नए चिकित्सा महाविद्यालयों को मान्यता दिलाने तथा कर्मियों की कमी को छिपाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
संगठनों का कहना है कि बिना पर्याप्त सत्यापन के बाहरी राज्यों के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को अनुमति देना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इससे फर्जी प्रमाणपत्रों और अप्रमाणित योग्यता वाले लोगों के प्रवेश की आशंका बढ़ सकती है, जिसका सीधा प्रभाव मरीजों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
स्थानीय युवाओं के अवसर प्रभावित होने की आशंका
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश के हजारों युवा वर्षों की पढ़ाई और प्रशिक्षण के बाद रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे समय में बाहरी राज्यों के स्वास्थ्यकर्मियों को बिना स्थानीय पंजीयन प्रक्रिया के अनुमति देने से स्थानीय युवाओं के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। उनका मानना है कि सरकार को पहले प्रदेश के प्रशिक्षित युवाओं के हितों पर विचार करना चाहिए।
चिकित्सा परिषद की भूमिका को लेकर भी सवाल
विशेषज्ञों ने यह भी सवाल उठाया है कि ऐसा निर्णय स्वास्थ्य सचिवालय के बजाय चिकित्सा परिषद की सक्षम समिति के माध्यम से होना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि बाहरी राज्यों से आने वाले चिकित्सकों का कठोर सत्यापन नहीं किया गया, तो प्रदेश में अवैध और अप्रमाणित चिकित्सा करने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
आदेश वापस नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
जूनियर चिकित्सक संघ तथा अन्य स्वास्थ्य संगठनों ने शासन से अधिसूचना पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में शासन तथा संगठनों के बीच चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।