

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Complaint regarding misconduct towards female professors and students at the college; Women's Commission orders an inquiry.
रायपुर। राज्य महिला आयोग में महिला उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान एक शासकीय महाविद्यालय का मामला प्रमुखता से सामने आया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक और सदस्य सरला कोसरिया ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए संबंधित महाविद्यालय के प्राचार्य को 15 दिनों के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।मामले में नवागांव स्थित शासकीय नवीन महाविद्यालय की महिला सहायक प्राध्यापकों ने शिकायत दर्ज कराई कि एक पुरुष प्राध्यापक उनके साथ ही नहीं, बल्कि छात्र-छात्राओं के समक्ष भी अभद्र व्यवहार करता है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संबंधित प्राध्यापक अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने के साथ-साथ धमकी भी देता है। छात्र-छात्राओं पर अंक काटने की चेतावनी देकर दबाव बनाने के आरोप भी लगाए गए हैं।दूसरी ओर, आरोपित प्राध्यापक का कहना है कि महिला प्राध्यापक सामूहिक रूप से उनके विरुद्ध वातावरण बना रही हैं। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष आयोग के समक्ष रखे।
छात्र-छात्राओं ने भी दिया महिला प्राध्यापकों का समर्थन
प्रकरण में कई छात्र-छात्राओं ने लिखित शपथपत्र प्रस्तुत कर महिला प्राध्यापकों के आरोपों का समर्थन किया। आयोग ने इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़ा मामला मानते हुए महाविद्यालय प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।आयोग ने स्पष्ट किया कि शासकीय नियमों के अनुसार आंतरिक शिकायत समिति की जांच रिपोर्ट के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। शिकायतकर्ताओं ने यह आशंका भी जताई कि वर्तमान जांच समिति में शामिल एक सदस्य आरोपित पक्ष के समर्थन में है, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
महिला आयोग की प्रतिनिधि रहेंगी जांच प्रक्रिया में शामिल
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने अपनी सहायक संचालिका को जांच प्रक्रिया से जोड़ने का निर्णय लिया है। आयोग की ओर से महाविद्यालय की आंतरिक समिति को एक सप्ताह के भीतर बैठक आयोजित कर जांच शुरू करने तथा 15 दिनों में विस्तृत प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
चरित्र हनन और गाली-गलौज के मामले में समझौता
सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण में महिला ने दो व्यक्तियों पर सार्वजनिक रूप से चरित्र हनन करने और अपमानजनक शब्द कहने का आरोप लगाया। महिला का कहना था कि आरोपितों ने पहले माफी मांगने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया।आयोग की समझाइश के बाद आरोपित पक्ष ने खेद व्यक्त किया, जिसके बाद मामले का निराकरण कर उसे समाप्त कर दिया गया।
सरपंच और उपसरपंच के विवाद का भी हुआ समाधान
एक अन्य मामले में ग्राम पंचायत की महिला सरपंच और उपसरपंच के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद की सुनवाई हुई। दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरुद्ध लगातार शिकायतें कर रहे थे। आयोग की मध्यस्थता और समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने को तैयार हो गए। इसके बाद इस प्रकरण को भी निस्तारित कर दिया गया।