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Bhojshala controversy: Hearing continues for the third day in Indore High Court, arguments presented in favor of it being a temple.
इंदौर। ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में सुनवाई के तीसरे दिन याचिकाकर्ता पक्ष ने अपने तर्क मजबूती से पेश किए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत के समक्ष कहा कि मस्जिद पक्ष द्वारा दायर शपथ पत्र में ही भोजशाला के मंदिर होने के प्रमाण मौजूद हैं।
शपथ पत्र में ही मंदिर होने के संकेत: याचिकाकर्ता
वकील जैन ने दलील दी कि मौला कमालुद्दीन सोसायटी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों में जिन पुस्तकों का उल्लेख किया गया है, वे दर्शाती हैं कि 14वीं शताब्दी से पहले वहां मस्जिद का अस्तित्व नहीं था, जबकि भोजशाला का निर्माण वर्ष 1034 में हो चुका था।
मंदिर सामग्री से मस्जिद निर्माण का दावा
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि मस्जिद के निर्माण में मंदिर से प्राप्त सामग्री का उपयोग किया गया था, जो इस्लामिक कानून के अनुसार उचित नहीं माना जाता। उन्होंने दावा किया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाना या उसकी सामग्री का उपयोग करना वर्जित है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और तस्वीरों का हवाला
अधिवक्ता जैन ने कहा कि भोजशाला को मंदिर बताने का आधार केवल आस्था नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सर्वे और तथ्यात्मक प्रमाण हैं। उन्होंने अदालत में प्रस्तुत तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि ये स्पष्ट रूप से मंदिर के स्वरूप को दर्शाती हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया कि मस्जिद पक्ष ने इन तस्वीरों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
पूजा स्थल अधिनियम का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ता ने Places of Worship Act 1991 का हवाला देते हुए कहा कि किसी एक धर्म के धार्मिक स्थल को दूसरे धर्म के स्थल में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। ऐसे में भोजशाला के मूल स्वरूप को बदला नहीं जाना चाहिए।
सुनवाई जारी रहेगी
मामले में अदालत में बहस अभी जारी है और गुरुवार को भी सुनवाई होने की संभावना है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना जा रहा है।