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Bhupesh Baghel's attack on natural farming
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्राकृतिक खेती, शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में नई व्यवस्थाओं को लेकर भाजपा सरकार और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के नाम पर गलत प्रचार किया जा रहा है और इससे किसानों को नुकसान होगा।
भूपेश बघेल ने कहा कि प्राकृतिक खेती का मतलब केवल बीज छिड़क देने से खेती सफल नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सोच है, जिसे इस तरह प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चाहती है कि देश में अनाज की कमी हो जाए, किसान कंगाल हो जाएं और उत्पादन प्रभावित हो।
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर खाद संकट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों को डीएपी, यूरिया और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं और आने वाले समय में कीटनाशकों की भी कमी हो सकती है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यदि भाजपा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहती है, तो गौठान और वर्मी कंपोस्ट निर्माण की व्यवस्था क्यों बंद कर दी गई। उन्होंने इसे भाजपा की संकुचित सोच करार दिया।
शिक्षा के मुद्दे पर भूपेश बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने परीक्षा पत्रों की सुरक्षा सेना की निगरानी में कराने का फैसला लेकर अपनी गलती स्वीकार कर ली है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य खराब हुआ है।
उन्होंने राज्य के स्कूलों की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले कई स्कूलों में पेयजल, शौचालय और संधारण की व्यवस्था तक पूरी नहीं हो पाई है।
इसके अलावा, उन्होंने स्कूलों में राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत और भोजन मंत्र को शामिल करने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसमें राज्यगीत को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार राज्यगीत की उपेक्षा कर रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।