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CG News: Major decision by the Education Department—salary to be withheld if online attendance is not marked; National Anthem and State Song made mandatory in schools.
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग ने दो महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिए हैं। विभाग द्वारा जारी आदेशों के अनुसार 16 जून से सरकारी स्कूलों और विभागीय कार्यालयों में डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी। वहीं नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत और भोजन मंत्र का गायन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक, कर्मचारी और विभागीय कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को अब नियमित रूप से डिजिटल माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होगी। यदि किसी कर्मचारी की उपस्थिति निर्धारित पोर्टल या बायोमेट्रिक प्रणाली में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसकी उपस्थिति शून्य मानी जाएगी और जून माह का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
विभाग ने इस व्यवस्था के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) को सौंपी है। आदेश में कहा गया है कि उपस्थिति संबंधी लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने कार्यालयी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। अब सभी प्रकार के अवकाश आवेदन केवल एचआरएमआईएस पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार और स्वीकृत किए जाएंगे।
विभाग ने ऑफलाइन या कागजी आवेदन प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यदि कोई अधिकारी ऑफलाइन अवकाश आवेदन स्वीकार करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। वहीं विभागीय कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार आधार-सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से अपनी हाजिरी लगानी होगी।
शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र 2026-27 से सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत और भोजन मंत्र के नियमित गायन को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना को बढ़ावा मिलेगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इन फैसलों का उद्देश्य शिक्षा विभाग में समयबद्धता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। लंबे समय से शिक्षकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति, लेटलतीफी तथा ऑफलाइन प्रक्रियाओं को लेकर मिल रही शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
शिक्षा विभाग का मानना है कि डिजिटल उपस्थिति और ऑनलाइन प्रशासनिक प्रक्रियाओं से कार्यप्रणाली में सुधार आएगा, जबकि राष्ट्रगान और राज्यगीत जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक साबित होंगी।