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Shortcomings exposed right at the start of the new academic session: locked premises in some places, the havoc of heat in others.
दुर्ग। प्रदेश के कांकेर, दुर्ग, बालोद और राजनांदगांव जिलों में नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सामने आ गई है। और असुविधा ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
कांकेर जिले के ढोरकट्टा गांव में ग्रामीणों ने नए सत्र के पहले ही दिन स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन पिछले पांच वर्षों से पूरी तरह जर्जर है और बच्चों की पढ़ाई असुरक्षित माहौल में तिरपाल के नीचे कराई जा रही है। कई बार शिकायत के बावजूद नए भवन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई, जिससे नाराज होकर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया।
दुर्ग के स्कूलों में तेज गर्मी का असर बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई दिया। 41 डिग्री से अधिक तापमान के बीच कई छात्र असहज नजर आए। जेआरडी स्कूल में प्रार्थना के दौरान एक बच्चा अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा, जिससे स्कूल परिसर में अफरा तफरी मच गई। साथ ही कई स्थानों पर बच्चों के पास किताबें और गणवेश भी अधूरे पाए गए, जिससे शुरुआती दिन ही अव्यवस्था उजागर हो गई।
बालोद जिले के डौंडी ब्लॉक के ग्राम कांडे में अभिभावकों ने शिक्षक की मांग को लेकर प्राथमिक शाला में तालाबंदी कर दी। स्कूल परिसर में टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन भी किया गया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर एक शिक्षक की अस्थायी व्यवस्था की, जिसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
राजनांदगांव जिले में नए शिक्षा सत्र के पहले दिन ही स्कूलों में केवल लगभग 30 प्रतिशत छात्र ही उपस्थित हुए। प्रचंड गर्मी के कारण अधिकांश बच्चों ने स्कूल आने से दूरी बनाए रखी। इसके साथ ही शिक्षकों के लिए अनिवार्य अटेंडेंस एप भी पहले ही दिन क्रैश हो गया, जिससे उपस्थिति दर्ज करने में भारी परेशानी हुई।
नए सत्र की शुरुआत के साथ ही यह साफ हो गया है कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, गर्मी की मार, तकनीकी खामियां और प्रशासनिक देरी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पहले ही दिन सामने आए ये हालात पूरे शिक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।