

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Big blow to Kejriwal: Same judge will hear the case, High Court clarifies its stand
नई दिल्ली। आबकारी घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें स्वर्ण कांता शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग करने की अपील की गई थी।
कोर्ट का कड़ा संदेश: जज पर शक करने की इजाजत नहीं
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी जज के परिवार के सदस्य यदि सरकारी पैनल में वकील हैं या किसी कार्यक्रम में शामिल हुए हैं, तो इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि जज पक्षपाती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी राजनेता को न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
न्याय झुकता नहीं, फैसले से पहले नहीं हटूंगी: जस्टिस शर्मा
सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेहद सख्त और स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी निष्ठा संविधान के प्रति है। उन्होंने कहा कि न्याय किसी दबाव में नहीं दिया जाता और वह बिना किसी डर के निष्पक्ष फैसला करेंगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि वह इस मामले की सुनवाई से पीछे नहीं हटेंगी।
34 साल के करियर पर उठे सवाल, जज ने जताई पीड़ा
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उनका न्यायिक करियर 34 साल का रहा है, लेकिन अब ऐसा माहौल बन रहा है जहां जजों को अपनी निष्पक्षता साबित करने के लिए मनगढ़ंत कसौटियों पर खरा उतरना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब जजों को केस सुनने के लिए भी किसी तरह की परीक्षा देनी होगी।
एक मामले में खुद को किया अलग, अगली सुनवाई तय
हालांकि, एक अलग मामले में जस्टिस शर्मा ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। यह मामला आप के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान की जमानत याचिका से जुड़ा है, जो महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत दर्ज केस से संबंधित है। अदालत ने इस मामले को 23 अप्रैल को किसी अन्य जज के सामने सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर सख्त संकेत
इस पूरे घटनाक्रम से हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी जता दिया कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों को गंभीरता से लिया जाएगा।