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शेयर बाजार में गुरुवार को हुई बड़ी गिरावट से दलाल स्ट्रीट में हलचल मच गई। बीएसई सेंसेक्स 1247.71 यानि 1.67% की बड़ी गिरावट के साथ 73580.54 के स्तर पर बंद हुआ। यह एक दिन में बीते 10 हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं, एनएसई यानि निफ्टी-50 भी 383.70 अंक यानि 1.64% फिसलकर 23063.10 के स्तर पर आ गया। यह निफ्टी में पिछले 3 महीने का सबसे निचला स्तर है।
बाजार की इस चौतरफा बिकवाली में निवेशकों को अच्छा-खासा नुकसान उठाना पड़ा है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 4.33 लाख करोड़ घटकर 480.68 लाख करोड़ रुपए रह गया। लार्जकैप ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुए हैं। इस भारी बिकवाली से बाजार में घबराहट का माहौल बना और इंडिया वीआईएक्स, यानि बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव 9.90 फीसदी उछलकर 12.69 पर पहुंच गया, जो आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक अस्थिरता का संकेत देता है।
शेयर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट के मुख्य कारण ये बताए जा रहे हैं;
बीमा कमीशन पर प्रस्ताव है, जिसके तहत इंश्यरेंस रेगुलेटर यानि 'इरडा' ने बीमा उत्पादों और वितरण चैनलों के लिए 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन पेआउट्स का प्रस्ताव दिया है। इससे बैंक, एनबीएफसी और बीमा डिस्ट्रीब्यूटर्स की फीस से होने वाली आय प्रभावित होने की आशंका है।
कच्चा तेल यानि क्रूड ऑयल का दाम बढ़कर 102 डॉलर होना। इससे भारत के आयात बिल और महंगाई पर सीधा खतरा पैदा हो गया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 10 साल में बढ़कर 5.11 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जो 2007 के बाद सर्वोच्च स्तर पर है। इससे वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रहने और लिक्विडिटी कम होने की आशंका है।
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट पर बाजार विशेषज्ञों का कहना है, कि वैश्विक बाजारों से बेहद नकारात्मक संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। वहीं आईपीओ की बाढ़ आने के कारण सेकेंडरी मार्केट यानि शेयर बाजार में नकदी की भारी कमी हो गई है। अगले कुछ हफ्तों से लेकर दो महीने तक भारतीय बाजार में दबाव बना रह सकता है। कई और आईपीओ अभी पाइपलाइन में हैं, जिससे बाजार की लिक्विडिटी में तंगी बनी रहने की संभाव