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Bihar government to formulate policy on children's screen time; NIMHANS seeks report
पटना। बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बिहार सरकार नीति बनाने की तैयारी में है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस विषय पर बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (निमहांस) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद राज्य सरकार एक समग्र नीति तैयार करेगी, जिससे बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों को कम किया जा सके।
प्रश्नकाल में उठा मुद्दा
विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान जदयू विधायक समृद्ध वर्मा ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बच्चे “अंतहीन स्क्रॉल” में फंस जाते हैं और यह एक तरह की “अदृश्य महामारी” बनती जा रही है। उन्होंने स्कूलों में ‘डिजिटल हाइजीन’ विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने की भी मांग की, ताकि बच्चों को तकनीक के संतुलित और सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा सके।
अन्य राज्यों में भी मंथन
गौरतलब है कि हाल के दिनों में केंद्र सरकार के अलावा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में भी बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने को लेकर मंथन चल रहा है। बिहार सरकार की पहल को इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते स्पष्ट दिशा-निर्देश और जागरूकता कार्यक्रम लागू किए गए तो बच्चों को डिजिटल लत, मानसिक तनाव और अन्य नकारात्मक प्रभावों से बचाया जा सकता है।