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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गोंदिया से जबलपुर तक रेलवे लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। करीब 231 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹5,236 करोड़ की लागत आएगी और इसे पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह परियोजना न सिर्फ रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, बल्कि उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में भी काम करेगी। इसे रामायण सर्किट से जोड़कर भी देखा जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस परियोजना से गोंदिया (महाराष्ट्र), जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट जैसे जिलों में यात्री और माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी। खासतौर पर बालाघाट जिले को विकास के नए अवसर मिलेंगे।
रेल लाइन दोहरीकरण के साथ पर्यावरण संतुलन को भी प्राथमिकता दी गई है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ₹450 करोड़ अंडरपास और फेंसिंग पर खर्च होंगे।
जबलपुर के सांसद आशीष दुबे ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है।

उन्होंने अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा- जबलपुर–गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण को केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिलना क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
इस जनहितकारी निर्णय के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी एवं केंद्रीय रेल मंत्री श्री Ashwini Vaishnaw जी का हृदय से आभार एवं अभिनंदन।
231 किमी लंबी इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लगभग ₹5,236 करोड़ की लागत से कार्य होगा। इसके पूर्ण होने पर जबलपुर रेल यातायात का केंद्र बनकर उभरेगा,जिससे उत्तर से दक्षिण सुगम एवं आसान रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी,जबकि गोंदिया से हाई डेंसिटी नेटवर्क से बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित होगा।
यह परियोजना जबलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में यात्री और माल परिवहन क्षमता को बढ़ाएगी,औद्योगिक एवं पर्यटन गतिविधियों को नई गति देगी, लॉजिस्टिक लागत में कमी लाएगी तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में CO₂ उत्सर्जन घटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।