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Bilaspur District Consumer Disputes Redressal Commission
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने बिना पर्याप्त तकनीकी साक्ष्यों के बीमा दावा खारिज करने को अनुचित मानते हुए कंपनी को परिवादी को 28.24 लाख रुपये से अधिक की राशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
आयोग ने निर्देश दिया है कि बीमा कंपनी डेढ़ महीने के भीतर भुगतान सुनिश्चित करे। आदेश के तहत कंपनी को एक्सीवेटर मशीन की क्षति के लिए 27.94 लाख रुपये, मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये देने होंगे। इसके अलावा वर्ष 2022 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
आग लगने से क्षतिग्रस्त हुई थी मशीन
मामला कोरबा निवासी एके शर्मा से जुड़ा है। उनकी वोल्वो क्राउलर एक्सीवेटर मशीन 7 अगस्त 2021 को एसईसीएल की बिजारी खदान में काम के दौरान आग लगने से क्षतिग्रस्त हो गई थी। मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से 'कॉन्ट्रैक्ट प्लांट एंड मशीनरी पॉलिसी' के तहत कराया गया था।
घटना के बाद शर्मा ने मशीन की मरम्मत पर 46.41 लाख रुपये खर्च होने का दावा बीमा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच के लिए नियुक्त सर्वेयर मैक इंश्योरेंस सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में आग लगने का कारण कंट्रोल पैनल में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट बताया और इसे आकस्मिक दुर्घटना माना।
तकनीकी साक्ष्य नहीं दे पाई बीमा कंपनी
बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मशीन का ऑपरेटर उसे चालू हालत में छोड़कर चला गया था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। हालांकि, आयोग की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मशीन में ऑटो-कट तकनीक लगी हुई थी, जिसके तहत चाबी बंद करने के तीन मिनट बाद मशीन स्वतः बंद हो जाती है।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने माना कि ऐसी स्थिति में ऑपरेटर की लापरवाही नहीं मानी जा सकती। साथ ही बीमा कंपनी ऑपरेटर की जानबूझकर की गई लापरवाही साबित करने में भी असफल रही।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बिना ठोस तकनीकी साक्ष्य के बीमा क्लेम खारिज करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर बीमा कंपनी को परिवादी को 28.24 लाख रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति राशि ब्याज सहित देने का आदेश दिया गया है।