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Bus fare hike, no order issued: Questions raised over arbitrary collection from passengers
रायपुर। छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग की अंतिम स्वीकृति मिलने से पहले ही कई निजी बस संचालकों ने किराया बढ़ाकर यात्रियों से वसूली शुरू कर दी है। रायपुर से बस्तर संभाग सहित विभिन्न प्रमुख मार्गों पर साधारण और वातानुकूलित बसों के किराये में 15 से 23 प्रतिशत तक वृद्धि कर दी गई है। इस कदम को लेकर यात्रियों और उपभोक्ता संगठनों ने आपत्ति जताई है।
विभागीय निर्णय से पहले ही लागू कर दी नई दरें
मंगलवार को परिवहन विभाग और बस संचालकों के बीच हुई बैठक में संचालकों ने किराये में 20 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी शासन स्तर पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इसके बावजूद कई बस संचालकों ने नई किराया सूची जारी कर बढ़ी हुई दरों पर यात्रियों से राशि वसूलना शुरू कर दिया है।
रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर सबसे अधिक असर
रायपुर से जगदलपुर जाने वाली रात्रिकालीन साधारण बस का किराया 600 रुपये से बढ़ाकर 700 रुपये कर दिया गया है, जो लगभग 16.67 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं वातानुकूलित बस का किराया 650 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है, जिससे यात्रियों पर लगभग 23 प्रतिशत अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
विभिन्न मार्गों पर संशोधित किराया
अभनपुर: 60 से बढ़कर 70 रुपये
धमतरी: 130 से बढ़कर 180 रुपये
महासमुंद: 220 से बढ़कर 275 रुपये
कांकेर: 275 से बढ़कर 320 रुपये
केशकाल: 340 से बढ़कर 390 रुपये
कोण्डागांव: 450 से बढ़कर 520 रुपये
जगदलपुर: 600 से बढ़कर 700 रुपये
वातानुकूलित बसों का नया किराया
दुर्ग: 250 से बढ़कर 313 रुपये
राजनांदगांव: 350 से बढ़कर 438 रुपये
बिलासपुर: 650 से बढ़कर 813 रुपये
कोरिया: 950 से बढ़कर 1,188 रुपये
मनेंद्रगढ़: 900 से बढ़कर 1,125 रुपये
बस संचालकों ने बताया बढ़ते खर्च का दबाव
बस संचालकों का कहना है कि वर्ष 2021 के बाद किराये में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि डीजल, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ा है। उन्होंने सरकार से ऐसी स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसके तहत डीजल की कीमतों के आधार पर किराया स्वतः निर्धारित हो सके।
परिवहन विभाग ने दी कार्रवाई की चेतावनी
परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने स्पष्ट किया है कि किराया वृद्धि के प्रस्ताव को शासन के पास भेजा गया है और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि कोई बस संचालक निर्धारित स्वीकृति के बिना मनमाने ढंग से अधिक किराया वसूलता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यात्री संगठनों ने जताई नाराजगी
यात्री संगठनों का कहना है कि बिना सरकारी अनुमति किराया बढ़ाना अनुचित है। उनका तर्क है कि इससे आम यात्रियों पर सीधा आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सार्वजनिक परिवहन महंगा हो जाएगा। संगठनों ने शासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मनमानी वसूली पर रोक लगाने की मांग की है।