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OSM is not the villain, flaws in the system are the real challenge - Dr. Jawahar Suri Shetty
भिलाई। ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर चल रही बहस के बीच रूंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी, भिलाई के कुलपति एवं शिक्षाविद् डॉ. जवाहर सूरी शेट्टी ने कहा है कि ओएसएम स्वयं कोई समस्या नहीं है, बल्कि इसके कार्यान्वयन में मौजूद कमियां ही वास्तविक चुनौती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नई प्रणाली का मूल्यांकन उसके मूल विचार के बजाय उसके प्रभावी निष्पादन के आधार पर किया जाना चाहिए।
वैश्विक स्तर पर सफल मॉडल के रूप में स्थापित है ओएसएम
डॉ. शेट्टी ने कहा कि, ऑन-स्क्रीन मार्किंग दुनिया भर के कई प्रतिष्ठित परीक्षा एवं मूल्यांकन संस्थानों द्वारा अपनाई गई एक वैश्विक सर्वोत्तम प्रथा है। पारंपरिक कागज-आधारित मूल्यांकन की तुलना में यह प्रणाली बेहतर निगरानी, तेज प्रक्रिया, पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अनेक लाभ प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल बैकलॉरिएट ऑर्गनाइजेशन सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वर्षों से डिजिटल मूल्यांकन का सफलतापूर्वक उपयोग कर रही हैं।
एआई से बढ़ेगी निष्पक्षता और पारदर्शिता
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने ओएसएम की उपयोगिता को और मजबूत किया है। एआई आधारित मूल्यांकन विश्लेषण परीक्षकों के संभावित पूर्वाग्रह, अत्यधिक उदार या कठोर मूल्यांकन तथा मार्किंग में असंगतियों की पहचान कर सकता है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है।
बदलाव के दौर में हाइब्रिड मॉडल को बताया बेहतर विकल्प
डॉ. शेट्टी के अनुसार किसी भी बड़े शैक्षणिक सुधार के शुरुआती चरण में चुनौतियां आना स्वाभाविक है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रारंभिक वर्षों में पारंपरिक और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को साथ लेकर चलने वाला हाइब्रिड मॉडल अधिक व्यावहारिक साबित हो सकता है। इससे परीक्षकों का विश्वास बढ़ाने, प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और तकनीकी कमियों को दूर करने का पर्याप्त समय मिलेगा।
खराब कार्यान्वयन के कारण पूरी व्यवस्था को न करें खारिज
उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वेंडर या तकनीकी एजेंसी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो समाधान पूरी प्रणाली को समाप्त करना नहीं, बल्कि खरीद प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और सिस्टम डिजाइन में सुधार करना होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुरुआती कठिनाइयों के आधार पर ओएसएम जैसी आधुनिक और उपयोगी प्रणाली को खारिज करना उचित नहीं होगा।
शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
डॉ. शेट्टी ने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आवश्यकता इस बात की है कि इसके कार्यान्वयन को मजबूत बनाया जाए ताकि विद्यार्थियों, परीक्षकों और संस्थानों को इसका पूरा लाभ मिल सके।