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Businessman Satpal Singh Chhabra arrested in DMF scam; court grants 5-day remand.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF (जिला खनिज न्यास) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने मंगलवार रात करीब 8 बजे उन्हें विशेष अदालत में पेश किया और पूछताछ के लिए 5 दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी। अदालत ने 5 सितंबर तक रिमांड मंजूर की है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, ED ने छाबड़ा की गिरफ्तारी DMF फंड में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत की है।
575 करोड़ रुपये के कामों में गड़बड़ी का आरोप
जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, करीब 575 करोड़ रुपये के DMF कार्यों में अधिकारियों, कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच कथित मिलीभगत से अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि DMF की राशि, जिसका इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए किया जाना था, उसमें कमीशनखोरी का नेटवर्क तैयार किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क में कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छाबड़ा पर सरकारी विभागों में काम दिलाने और सप्लाई ऑर्डर हासिल कराने के बदले वेंडरों से कथित तौर पर भारी कमीशन लेने का आरोप है।
30 से 35 फीसदी तक कमीशन लेने का दावा
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, छाबड़ा वर्ष 2019 से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग में रेट कॉन्ट्रैक्ट वाले विक्रेताओं और विभाग के बीच बिचौलिए की भूमिका में काम कर रहे थे। आरोप है कि वह विक्रेताओं से कमीशन लेकर उन्हें सप्लाई ऑर्डर और काम दिलाने की व्यवस्था करता था।
जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ मामलों में 30 से 35 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। आरोप है कि इस कमीशन की रकम का एक हिस्सा अधिकारियों और राजनीतिक स्तर तक पहुंचाया जाता था, जबकि बाकी रकम कथित नेटवर्क में शामिल लोगों के बीच बांटी जाती थी। ऐसे ही आरोपों का उल्लेख पूर्व की जांच और अदालती कार्यवाहियों में भी सामने आया है।
अधिकारियों और नेताओं तक रकम पहुंचाने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित कमीशन की रकम केवल बिचौलियों और कारोबारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक लोगों तक पहुंचाने का दावा किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, करीब 10 प्रतिशत रकम अधिकारियों और नेताओं तक पहुंचाने तथा शेष रकम बिचौलियों के बीच बांटने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
ठेकेदारों को करीब 60.75 करोड़ के काम दिलाने का दावा
जांच से जुड़े विवरण के अनुसार, छाबड़ा ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग से जुड़े करीब 60.75 करोड़ रुपये के काम ठेकेदारों को दिलाए। इसके बदले कथित तौर पर लगभग 14.62 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में लिए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसमें से करीब 5 करोड़ रुपये अपने पास रखने का आरोप छाबड़ा पर है।
पूर्व की जांच रिपोर्टों में भी छाबड़ा को कमीशन नेटवर्क के प्रमुख बिचौलियों में से एक बताया गया है।
फरवरी में भी हुई थी गिरफ्तारी
सतपाल सिंह छाबड़ा इससे पहले भी DMF घोटाला मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। फरवरी 2026 में ACB-EOW ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां अदालत ने पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड मंजूर की थी। एजेंसी ने उस समय भी कथित कमीशन, वित्तीय लेन-देन और सरकारी योजनाओं में नियमों की अनदेखी से जुड़े आरोपों की जांच की थी।
बाद में जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत भी मिली थी।
अब ED खंगालेगी पैसों का पूरा नेटवर्क
ED की ताजा कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस कथित कमीशन की मनी ट्रेल, बैंक खातों, लेन-देन, संपत्तियों और अन्य आरोपितों से संबंधों पर रहने की संभावना है। पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड के दौरान एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि DMF के कामों में कथित कमीशन का नेटवर्क कैसे संचालित होता था और रकम किन-किन लोगों तक पहुंची।
इसी मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य आरोपितों तक पहुंच चुकी है। छाबड़ा की गिरफ्तारी को मामले में आगे की जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है।