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CG Crime: 53.60 lakh rupees defrauded in the name of government project, solar light scheme becomes a web of fraud
रायपुर। सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर बड़ा ठगी कांड सामने आया है, जहां एक ठेकेदार से 53 लाख 60 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई। थाना खम्हारडीह में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपितों ने सरकारी प्रोजेक्ट का झांसा देकर फर्जी दस्तावेज और टेंडर के जरिए निवेश करवाया और पूरी रकम हड़प ली।
कैसे रचा गया पूरा खेल, जानिए पूरा मामला
शिकायतकर्ता अंकित गोयल, जो ठेकेदारी से जुड़े हैं, उनकी मुलाकात 2024 में एक व्यक्ति से हुई जिसने बस्तर संभाग में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने का बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का दावा किया। इसके बाद राहुल शुक्ला और उसकी पत्नी ने खुद को इस योजना से जुड़ा बताते हुए निवेश का प्रस्ताव दिया।उन्होंने बताया कि हर ग्राम पंचायत में 20 सोलर लाइट लगाई जाएंगी और प्रति यूनिट करीब 48 हजार रुपये का भुगतान शासन से मिलेगा। इस ‘लाभकारी योजना’ का लालच देकर पीड़ित का भरोसा जीत लिया गया।
फर्जी आदेश और दस्तावेज दिखाकर बढ़ाया विश्वास
आरोप है कि आरोपितों ने जनपद पंचायत दरभा के नाम से फर्जी आदेश और दस्तावेज दिखाए। यहां तक कि टेंडर, सप्लाई और पेमेंट की पूरी प्रक्रिया अपने नियंत्रण में होने का दावा भी किया गया। शुरुआत में 10 लाख रुपये नकद लिए गए, फिर अलग-अलग किश्तों में 5 लाख, 15 लाख और 3.60 लाख रुपये बैंक ट्रांसफर कराए गए, जबकि करीब 20 लाख रुपये नकद भी लिए गए।
समय बीता, काम नहीं मिला और खुल गया फर्जीवाड़ा
जब तय समय तक न तो कोई काम मिला और न ही भुगतान हुआ, तो पीड़ित को शक हुआ। मार्च 2025 तक पैसे वापस नहीं मिलने पर आरोपितों ने टालमटोल शुरू कर दी। बाद में जांच में सामने आया कि दिखाए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे और किसी भी पंचायत से कोई वास्तविक आदेश जारी नहीं हुआ था।
जगदलपुर तक ले जाकर किया भ्रमित, फिर किया इनकार
पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए आरोपित उसे जगदलपुर के जनपद कार्यालय तक ले गए, जहां एक व्यक्ति ने खुद को अधिकारी बताकर प्रक्रिया जारी होने का झूठा आश्वासन दिया। लेकिन बाद में पूरा मामला फर्जी निकला और पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया।
पुलिस जांच में जुटी, कई और नाम आने की संभावना
पुलिस ने राहुल शुक्ला, उसकी पत्नी और अन्य सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक ट्रांजेक्शन, एग्रीमेंट और फर्जी दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। साथ ही जनपद पंचायत दरभा के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
सावधानी जरूरी: निवेश से पहले करें पूरी जांच
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सरकारी प्रोजेक्ट के नाम पर निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल कितनी जरूरी है। फर्जी टेंडर और दस्तावेजों के झांसे में आकर बड़ी रकम गंवाना भारी पड़ सकता है।