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CG News Sales are going on indiscriminately even after the ban People are becoming victims of accidents due to Chinese boats
रायपुर। राजधानी में धड़ल्ले से बिक रहे चाइनीज मांझे आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं। प्रतिबंधित होने के बाद भी दुकानों में ये आसानी से मिल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं। बता दें कि, गोलबाजार, बूढ़ापारा सहित शहर के अन्य जगहों में चाइनीज मांझे के दुकानदार बड़ों के साथ बच्चों को भी आसानी से चाइनीज मांझा बेच रहे हैं।
वहीं बीते रविवार को चाइनीज मांझे से ही महिला वकील पूर्णशा कौशीर का जहां गला और हाथ लहूलुहान हो गया, वहीं दिसंबर माह में भी इसी तरह का एक और मामला सामने आया था। चाइनीज मांझे के शिकार युवक को अस्पताल में दो से तीन दिनों तक भर्ती रखकर इलाज करवाना पड़ा था। प्रतिबंध के बावजूद शहर में खुलेआम चाइनीज मांझे की बिक्री के साथ ही इसका उपयोग भी किया जा रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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वहीं कल बीते रविवार राजधानी के पचपेड़ी नाका में रविवार शाम 5 बजे चायनीज मांझे की वजह से 7 साल के मासूम की मौत हो गई। मासूम पिता के साथ गार्डन घूमने जा रहा था। अचानक एक चाइनीज मांझा उड़कर आया और बच्चे के गले में फंस गए। थोड़ी ही देर में बच्चा लहूलुहान हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने बच्चे को तुरंत नजदीक के पुष्कर अस्पताल में पहुंचाया। वहां इलाज नहीं हो पाया तो उसे बच्चों के अस्पताल ले गए। लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने भी इलाज करने से मना कर दिया। तब बच्चे को अंबेडकर अस्पताल लाया गया। जहां इलाज के दौरान रात 8 बजे उसकी मौत हो गई। इसी समय देवेंद्र नगर में एक महिला वकील और बूढ़ापारा में एक युवक भी गंभीर चाइनीज मांझे से घायल हो गए। पिरदा के रहने वाले धनेश साहू (35) गाड़ी मैकेनिक हैं। वे संतोषी नगर में किराए के मकान में रहते हैं। कार शो रूम में काम करते हैं। धनेश ने भास्कर से बातचीत करते हुए फफक पड़े। उन्होंने बेटे की मौत के लिए पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार माना। क्योंकि प्रतिबंध के बाद भी शहर में खुलेआम चायनीज मांझा बिक रहा है।

उन्होंने रोते हुए बताया कि, उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा फलेश साहू (12) और छोटा पुष्कर साहू (7) था। छोटा बेटा पुष्कर पहली कक्षा में पढ़ता था। उसने रविवार शाम गार्डन जाने की जिद की। तब मोपेड पर शाम को कटोरा तालाब गार्डन जाने के लिए निकले थे। साथ में पड़ोसी की बच्ची भी थी। संतोषीनगर ब्रिज के नीचे से पचपेड़ीनाका आ रहे थे। ब्रिज के पास एक मांझा उड़कर आया। पुष्कर मोपेड में आगे खड़ा हुआ था। मांझा सीधे उसके गले में फंस गया। धनेश ने बताया कि, बेटे के गले में जब मांझा फंसा तो उन्होंने निकालने की बहुत कोशिश की। मांझे को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन टूटा ही नहीं। तब दांत से कटाना पड़ा। बहुत मुश्किल से मांझा टूटा। यह चायनीज मांझा है, जिससे पतंग उड़ाया जा रहा था।
वहीं कल टिकरापारा में 7 साल के बच्चे की मौत की सूचना मिलने पर रायपुर एसएसपी ने कहा कि, यह घटना बहुत ही दुखद है, घटना की जांच की जा रही है। पुलिस की टीम घटनास्थल गई थी। वहां से मांझा जब्त किया गया है। शहर के पतंग दुकानों में भी जांच की जाएगी कि, प्रतिबंध के बाद भी चाइनीज मांझा तो बिक नहीं रहा है।
केस-1: जनवरी 2023 में एक युवती पंडरी, राजातालाब के पास अपनी स्कूटी से कही जा रही थी। उसी समय वह चाइनीज मांझे की जद में आ गई। युवती का गला कट गया और उसकी उंगलियां भी काफी जख्मी हो गई।
केस-2: जनवरी 2023 में दुर्ग के महावीर कालोनी का पांच वर्ष का बच्चा अपने पिता के साथ स्कूटी में सवार होकर बाजार जा रहा था। तभी सड़क किनारे पतंग उड़ाते हुए पेंच लड़ा रहे बच्चों की पतंग का मांझा स्कूटी पर पीछे बैठे बच्चा के गले में फंस गया।
केस-3: जनवरी 2024 में दुर्ग में चाइनीज मांझे से गला कटने से एक युवक की मौत हो गई। युवक अपने एक रिश्तेदार के साथ बाइक से जा रहा था। रिश्तेदार भी सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
वहीं बीते रविवार को गोपाल भिसे अपने बच्चे के साथ आंबेडकर अस्पताल के लिए निकले थे, तभी मौदहापारा में एक लड़का मांझा को पकड़कर खड़ा हुआ था। इसी दौरान अचानक उनके गर्दन में मांझा फंस गया, जिसको अपने हाथों से फौरन निकाल कर गाड़ी को रोका और पीछे से आ रहे बाइक सवार ने फौरन उस मांझा पकड़े लड़के के पास जाकर उसे समझाया और जाने दिया। गोपाल का कहना है कि, अगर सही समय में मांझा के हाथ से नहीं पकड़ पाते तो गंभीर चोट लग सकती थी।
बता दें कि, मध्यप्रदेश में चाइनीज मांझा को लेकर रासुका के तहत कार्रवाई की जाती है। यहां की सरकार ने सख्त कदम उठाया है। सरकार ने चाइनीज मांझा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, छत्तीसगढ़ में कुछ संगठन भी लगातार चाइनीज मांझे को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग उठाते रहते है, लेकिन फिर भी चोरी छिपे इसका व्यापार होता रहता है। इसके चलते आए दिन लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं।