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Case of ₹182.98 crore in excess payments within the Chhattisgarh liquor scam: EOW files final charge sheet against 13 accused.
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सरकारी शराब दुकानों के लिए कर्मचारियों की आपूर्ति से जुड़े कथित मैनपावर घोटाले में अदालत के समक्ष अंतिम चार्जशीट पेश कर दी है। जांच एजेंसी ने इस मामले में 13 लोगों को आरोपित बनाया है। आरोप है कि मैनपावर एजेंसियों को विभिन्न मदों के नाम पर 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया गया और बाद में इस रकम का एक हिस्सा कमीशन के तौर पर अधिकारियों तथा कथित सिंडिकेट तक पहुंचाया गया।EOW के मुताबिक, अतिरिक्त भुगतान ओवरटाइम, बोनस, चार दिन के हॉलिडे-पे और सर्विस चार्ज जैसी मदों के आधार पर कराया गया था। इस राशि का लाभ तीन हजार से अधिक कर्मचारियों को मिलना था, लेकिन आरोप है कि उन्हें निर्धारित सामान्य वेतन ही दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि अतिरिक्त भुगतान की रकम निकालकर उसका इस्तेमाल कथित कमीशन के भुगतान में किया गया।
इस प्रकरण में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी, तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर और कारोबारी अनवर ढेबर समेत 13 लोगों को आरोपित बनाया गया है। जांच में मैनपावर एजेंसियों के संचालकों की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है।EOW ने जांच पूरी करने के बाद बुधवार को अदालत में अंतिम चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी के अनुसार, मामले में अधिकारियों, कर्मचारियों और कारोबारियों की कथित भूमिका की पड़ताल की गई है।
अरुणपति त्रिपाठी, तत्कालीन प्रबंध संचालक, CSMCL
नवीन प्रताप सिंह तोमर, तत्कालीन उप महाप्रबंधक, CSMCL
बच्छराज लोहिया, नई दिल्ली और रायपुर
अनवर ढेबर, बैरन बाजार, रायपुर
तिजऊराम निर्मलकर, शास्त्री नगर
अभिषेक सिंह, बलिया, उत्तर प्रदेश
नीरज चौधरी, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
अजय लोहिया, गुरुग्राम, हरियाणा
अजीत दराडे, पुणे
अमित प्रभाकर सालुंके, गुरुग्राम, हरियाणा
राजीव द्विवेदी, भोपाल, मध्य प्रदेश
संजीव जैन, भोपाल, मध्य प्रदेश
एन. उदय राव, सुपेला, दुर्ग
EOW की जांच के अनुसार, कथित मैनपावर घोटाले की योजना तीन चरणों में संचालित की गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव और अतिरिक्त भुगतान की विभिन्न मदों के माध्यम से रकम जारी कराने की व्यवस्था बनाई गई। इसी आधार पर मैनपावर एजेंसियों को सामान्य भुगतान से अधिक राशि मिलने का रास्ता तैयार हुआ।
दूसरे चरण में एजेंसियों ने अतिरिक्त बिल प्रस्तुत कर भुगतान प्राप्त किया। आरोप है कि भुगतान की रकम बैंक खातों से नकदी के रूप में निकाली गई, जबकि संबंधित कर्मचारियों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
तीसरे चरण में निकाली गई रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर कमीशन के रूप में अधिकारियों और सिंडिकेट से जुड़े लोगों तक पहुंचाया गया। EOW के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में मैनपावर एजेंसियों के संचालकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जांच एजेंसी के अनुसार, कथित लेनदेन में हवाला और अंगड़िया नेटवर्क का भी इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इस माध्यम से 60 से 70 करोड़ रुपये मुंबई और हैदराबाद भेजे गए। इसके अलावा, अरुणपति त्रिपाठी पर परिवार से जुड़ी एक फर्म के माध्यम से तीन करोड़ रुपये बेंगलुरु में संपत्ति में निवेश के लिए स्थानांतरित करने का आरोप है।EOW ने इन वित्तीय लेनदेन को कथित घोटाले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। मामले में दाखिल अंतिम चार्जशीट के बाद अब अदालत में आरोपों और जांच एजेंसी की ओर से पेश साक्ष्यों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी। आरोपितों के खिलाफ आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।