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Case of cardiologist with a fake degree back in the spotlight; questions raised over clean chit given to Apollo management.
बिलासपुर। अपोलो अस्पताल में फर्जी डिग्रियों के आधार पर कंसल्टेंट कार्डियोलाजिस्ट बनकर मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जान कैम का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पुलिस ने 27 जून 2025 को आरोपित चिकित्सक के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश कर दी थी। हालांकि, पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिलने का हवाला देते हुए अपोलो अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। इस बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के स्वजन ने पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआइ से कराने की मांग की है।
जांच में सामने आया कि आरोपित ने खुद को एमबीबीएस और एमआरसीपी विशेषज्ञ बताकर अस्पताल में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसे गंभीर उपचार किए। पुलिस के अनुसार उसने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के साथ अलग-अलग नामों से पहचान पत्र भी तैयार कराए थे, जिनका उपयोग अस्पताल में नौकरी और इलाज के दौरान किया गया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपित के कार्यकाल में 27 मरीजों की मौत हुई थी। हालांकि, पुलिस को ऐसे ठोस मेडिकल रिकार्ड और शिकायतें नहीं मिलीं, जिनके आधार पर इन मौतों को सीधे आरोपित की कथित धोखाधड़ी से जोड़ा जा सके। अब इस पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है। अदालत यह तय करेगी कि क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की जाए या मामले में आगे की जांच कराई जाए।
यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब मध्यप्रदेश के दमोह से आरोपित की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के पुत्र प्रदीप शुक्ल ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया कि उनके पिता का उपचार भी इसी फर्जी चिकित्सक ने किया था। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है।
एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल विवाह को विवादित बताकर पत्नी को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने बिलासपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पति आकाशदीप मनहर को पत्नी मंजू मनहर को प्रति माह दो हजार रुपये भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था।