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Chaitra Navratri will begin on March 19, a rare date of Kshaya Yoga is being formed after 52 years.
रायपुर। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नवरात्रि कई शुभ योगों में प्रारंभ हो रही है। खास बात यह है कि करीब 52 साल बाद नवरात्रि के पहले दिन तिथि क्षय का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके कारण प्रतिपदा तिथि छोटी रहेगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के मुताबिक ग्रहों की स्थिति के कारण इस बार की नवरात्रि विशेष फलदायक मानी जा रही है। नवरात्रि के आरंभ में लग्न में उच्च का शुक्र और महालक्ष्मी योग बन रहा है। वहीं षष्ठी, सप्तमी और अष्टमी को प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य और शोभन योग पड़ेंगे। इसके अलावा कई दिनों में रवियोग भी रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
पालकी पर होगा मां दुर्गा का आगमन
इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां दुर्गा का आगमन पालकी पर होगा और प्रस्थान मुर्गा पर माना जाएगा। नवरात्रि के साथ ही हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की भी शुरुआत होगी, जिसका नाम ‘रौद्र’ संवत्सर बताया गया है। इस संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे।
नवरात्रि के नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी और 27 मार्च को रामनवमी के साथ इसका समापन होगा। मंदिरों में अभी से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
क्यों बन रही है तिथि क्षय की स्थिति
शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला के आचार्य इंदुभवानंद तीर्थ के अनुसार इस वर्ष प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के समय उपलब्ध नहीं रहेगी। 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे तक अमावस्या रहेगी, इसके बाद प्रतिपदा शुरू होगी, जो 20 मार्च को तड़के 4:52 बजे समाप्त हो जाएगी। जब किसी तिथि का दोनों दिन सूर्योदय के समय अभाव हो, तो उसे तिथि क्षय कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसी स्थिति में पूर्व दिन को मान्य माना जाता है, इसलिए 19 मार्च से ही नवरात्रि प्रारंभ मानी जाएगी।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
वृषभ लग्न मुहूर्त: सुबह 9:13 से 11:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:46 से दोपहर 12:33 बजे तक
सिंह लग्न विजय मुहूर्त: दोपहर 3:40 से शाम 5:50 बजे तक
नौ दिन, नौ देवी और ग्रह दोषों की शांति
चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इन नौ रूपों की आराधना से अलग-अलग ग्रहों से जुड़े दोष शांत होते हैं।
पहला दिन: मां शैलपुत्री – मंगल दोष की शांति
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी – राहु से जुड़ी परेशानियों में राहत
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा – गुरु चांडाल दोष शांति
चौथा दिन: मां कूष्मांडा – शनि से जुड़े कष्टों से मुक्ति
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता – बुध ग्रह की शांति
छठवां दिन: मां कात्यायनी – केतु से संबंधित बाधाओं का निवारण
सातवां दिन: मां कालरात्रि – शुक्र दोष की शांति
आठवां दिन: मां महागौरी – सूर्य से जुड़े कष्ट दूर
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री – चंद्र से जुड़े मानसिक कष्टों में राहत