

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

Champat Rai leaves seclusion and returns to the company of saints.
अयोध्या: चढ़ावे की चोरी के छींटे दामन पर पड़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपतराय का आहत मन अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। उन्होंने पहले कहा था कि अयोध्या में सेवा पूरी हुई, लेकिन कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। इसी के चलते वह मंदिर के निकट बने तीर्थ क्षेत्र भवन तक ही सीमित हो गए थे और वहीं लोगों से मिलते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और अयोध्या के शीर्ष संतों की बैठक में क्लीनचिट दिए जाने के बाद अब उनके आहत मन को कुछ मरहम मिला है और उन्होंने इस भवन से बाहर कदम रखना शुरू कर दिया है।
शोक कार्यक्रम में शामिल होकर की बाहर की शुरुआत
पहली बार दिखे बाहर: दो दिन पूर्व वह पहली बार तीर्थ क्षेत्र भवन से बाहर किसी कार्यक्रम में दिखे और एक ट्रस्ट कर्मचारी के यहां आयोजित शोक कार्यक्रम में शामिल हुए।
मंदिरों का दौरा: चंपतराय शनिवार को भी निजी सहयोगी के साथ बाहर निकले तथा गोलाघाट के सीताकांत सदन सहित अन्य मंदिरों में पहुंचे।
सावन भर संतों से मिलने का कार्यक्रम तय
सूत्रों के अनुसार, अब चंपतराय नियमित रूप से अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में जाकर संतों का सान्निध्य प्राप्त कर संवाद करेंगे। सावन भर उनका मठ-मंदिरों में जाने का कार्यक्रम तय हो गया है और संतों ने इसे सुखद बताया है। संतों का मानना है कि उनके लोगों के बीच आने से अच्छा वातावरण बनेगा। ज्ञात हो कि 5 जून से ही चंपतराय बाहर आने-जाने से परहेज कर रहे थे।
चढ़ावे की चोरी मामले की जांच और अन्य आरोपियों की स्थिति
एसआईटी जांच: फिलहाल चढ़ावे की चोरी की जांच चल रही है। पहली एसआईटी का गठन 13 जून को हुआ था, और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अब नई एसआईटी जांच कर रही है।
क्लीनचिट: पहली एसआईटी की जांच की प्राथमिक रिपोर्ट में उनका नाम नहीं है। इस चोरी मामले में आठ आरोपी जेल में बंद हैं।
अन्य पदाधिकारियों की स्थिति: त्यागपत्र दे चुके पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र 15 दिन पहले से ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में आने लगे हैं और उनकी दिनचर्या भी सामान्य है। वहीं, विहिप नेता गोपाल राव ने रामनगरी में ही धूनी जमाए रखी है, हालांकि विहिप ने उन्हें नया दायित्व देकर उनका केंद्र दिल्ली कर दिया है, जिसके बावजूद गोपाल राव यहीं रहकर लोगों से गुपचुप तरीके से मिल-जुल रहे हैं और साधारण मार्ग से जाकर रामलला का दर्शन भी कर रहे हैं। उनका निवास फिलहाल कारसेवकपुरम में रहा है।