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Changes in electricity rates in Chhattisgarh; government provides significant protection to consumers through relief schemes.
रायपुर। विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बाद बिजली दरों में मामूली बढ़ोतरी की गई है, लेकिन राज्य सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए कई राहत योजनाएं लागू की हैं। मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर इसका असर सीमित रहने की बात कही जा रही है।
नए टैरिफ के तहत बिजली दरों में लगभग 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि सरकार का दावा है कि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका वास्तविक असर बहुत कम रहेगा।प्रदेश में लगभग 51 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। इस पूरी योजना का खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।
400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले करीब 26.5 लाख उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। इससे लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का असर या तो शून्य या फिर बहुत मामूली बताया जा रहा है।
राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन सरकार द्वारा इसे सब्सिडी के माध्यम से पूरा किया जा रहा है, जिससे किसानों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।वहीं पीएम सूर्यघर योजना के तहत लगभग 66 हजार उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, जिनमें से करीब 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है।
मुख्यमंत्री सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से शुरू की गई बिजली बिल समाधान योजना के तहत अब तक लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत शामिल है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिजली कंपनी का राजस्व अंतर बढ़कर लगभग 3980 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वर्ष 2018 19 में जहां कंपनी सरप्लस में थी, वहीं बाद के वर्षों में बढ़ती लागत, ईंधन खर्च और रखरखाव व्यय के कारण घाटा लगातार बढ़ा है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर के विरोध में कांग्रेस ने राज्यभर में आंदोलन का ऐलान किया है। 17 जून को सभी जिलों में बिजली कार्यालयों का घेराव और मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा।कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि घरेलू, गैर घरेलू और कृषि श्रेणी में बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद उपभोक्ताओं पर भार न्यूनतम रखने के लिए सब्सिडी और राहत योजनाएं लगातार जारी हैं, ताकि आम जनता को महंगे बिजली बिल से राहत मिल सके।