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Charge-sheet reveals: Online betting racket run via app modeled on 'Mahadev Book'
रायपुर। राजधानी रायपुर में महादेव बुक ऑनलाइन बेटिंग एप की तर्ज पर संचालित हो रहे एक बड़े अंतरराज्यीय सट्टा सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि राज्य के कई बड़े सटोरिए अब महादेव बुक के प्रमोटरों के मॉडल पर अपने स्वयं के बेटिंग एप तैयार कर ऑनलाइन सट्टे का कारोबार चला रहे हैं। इन एप्स के जरिए प्रतिदिन लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है।
पुलिस द्वारा गुलशन उर्फ बाबू खेमानी पैनल और सैंकी दरडा के खिलाफ पेश चार्जशीट में कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक बाबू खेमानी, सैंकी दरडा समेत अन्य सटोरिए अपने-अपने बेटिंग एप और पैनल संचालित कर रहे हैं। सभी आपसी समन्वय से काम कर रहे हैं, जबकि अधिकांश बड़े बुकी खुद को सामने आने से बचा रहे हैं।
जांच में पता चला है कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए अधिकांश सट्टा पैनल बंगाल, गोवा, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में शिफ्ट कर दिए गए हैं। हालांकि सट्टे का कारोबार और दांव अब भी छत्तीसगढ़ के लोगों से ही लिया जा रहा है। पुलिस के अनुसार राज्य में 261 से अधिक बड़े सटोरिए सक्रिय हैं, जो दूसरे कारोबार की आड़ में ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क चला रहे हैं।
चार्जशीट के अनुसार सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए म्यूल अकाउंट यानी अन्य लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि असली संचालकों की पहचान छिपी रहे। इन खातों में जमा रकम को मनी एक्सचेंज ऑपरेटरों के जरिए क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में बदलकर विदेश भेजा जाता है। बाद में यही रकम विभिन्न कंपनियों के माध्यम से वापस लाई जाती है। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क महादेव बुक की कार्यप्रणाली से काफी मिलता-जुलता है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बेसिक वेब और एंड्रॉयड आधारित बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने में करीब 20 लाख रुपये तक का खर्च आता है। वहीं लाइव ऑड्स, मल्टीपल गेम, पेमेंट गेटवे और एडमिन पैनल जैसी सुविधाओं वाले एडवांस बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने में 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। रायपुर के कई बुकी अब अपने स्वयं के एप के जरिए लाखों रुपये का सट्टा संचालित कर रहे हैं।
मुख्य आरोपी सैंकी दरडा ने आदित्य तिवारी, विवेक साहनी, हरी जोगी और दौलत चतुर्वेदानी समेत अन्य लोगों के नाम पर विभिन्न बैंकों में खाते खुलवा रखे थे। सट्टे की रकम इन्हीं खातों में जमा कराई जाती थी और बाद में उसे क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से यूएसडीटी में बदलकर आगे ट्रांसफर किया जाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने दो क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस भी ट्रेस किए हैं। प्रारंभिक जांच में इन वॉलेट्स के जरिए लाखों डॉलर के ट्रांजेक्शन होने की जानकारी मिली है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, वित्तीय लेन-देन और अंतरराज्यीय कड़ियों की भी जांच कर रही है।