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Chhattisgarh: Bilaspur High Court issues major decision, bans recovery from employees after retirement
बिलासपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में अहम निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी अधिकारी या कर्मचारी से गलत इंक्रीमेंट या अधिक भुगतान का हवाला देकर वसूली नहीं की जा सकती। जस्टिस पी.पी. साहू की सिंगल बेंच ने संभागीय संयुक्त संचालक, कोष-लेखा एवं पेंशन द्वारा जारी रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया।
आरक्षक रतन बहादुर ने दायर की थी याचिका
यह मामला छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सकरी) की दूसरी बटालियन में पदस्थ रहे आरक्षक रतन बहादुर से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि 62 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने पर पेंशन विभाग ने उन्हें गलत वेतनवृद्धि का हवाला देते हुए वसूली का नोटिस जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों के अनुसार रिटायरमेंट के एक वर्ष पहले या बाद में किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इस तर्क को सही मानते हुए विभाग की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना माना।
हजारों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
हाई कोर्ट के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। यह निर्णय उन हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सेवानिवृत्ति के समय विभागीय वसूली और मनमानी का सामना करते हैं।