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Chhattisgarh: 'Bima Sakhi' scheme gives women a new identity, a new model of empowerment in Chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की “बीमा सखी योजना” ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है। इस योजना के तहत 10वीं पास महिलाओं को एलआईसी एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए तीन वर्षों तक मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। प्रथम वर्ष में 7,000 रुपए, द्वितीय वर्ष में 6,000 रुपए और तृतीय वर्ष में 5,000 रुपए का वजीफा महिलाओं को दिया जाता है, जिससे प्रशिक्षण के दौरान भी उनकी आय बनी रहती है।

सुशासन का उदाहरण बन रहा जमीनी क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजना का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचे। विभिन्न जिलों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को इस योजना से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से महिलाओं को “बीमा सखी” के रूप में प्रशिक्षित कर एजेंट कोड उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में बीमा सेवाएं प्रदान कर सकें।
महिलाओं के लिए आय के नए अवसर
बीमा सखी योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को बहुआयामी आय का अवसर उपलब्ध करा रही है। स्टाइपेंड के साथ-साथ बीमा पॉलिसी बेचने पर महिलाओं को कमीशन भी मिलता है। शुरुआती चार महीनों में प्रति माह एक पॉलिसी पर 2,000 रुपए, अगले चार महीनों में 4,000 रुपए और अंतिम चार महीनों में 6,000 रुपए तक का कमीशन दिया जा रहा है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा पा रही हैं।

सत्यवंती बनीं बदलाव की प्रेरणा
ग्राम पंचायत जमुवाटाड़ की रहने वाली सत्यवंती इस योजना की सफलता की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। गरिमा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया और बीसी सखी एवं बीमा सखी के रूप में कार्य शुरू किया। आज वे गांव में बैंकिंग सेवाएं देने के साथ-साथ लोगों को जीवन बीमा के महत्व के प्रति जागरूक कर रही हैं।
पिछले पांच महीनों में सत्यवंती ने लगभग 70,000 रुपए की आय अर्जित की है। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।
वित्तीय समावेशन को मिल रहा बढ़ावा
बीमा सखी योजना ग्रामीण समाज में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। बीमा सखियां गांव-गांव जाकर लोगों को बीमा योजनाओं और आर्थिक सुरक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दे रही हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को आकस्मिक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ उनका भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।

पारदर्शिता और जनभागीदारी से बढ़ा भरोसा
राज्य सरकार ने योजना की चयन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया है। प्रशिक्षण और भुगतान प्रणाली भी व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही है। यही कारण है कि ग्रामीण महिलाओं का इस योजना के प्रति विश्वास लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़ रही हैं।
आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में मजबूत कदम
बीमा सखी योजना महिला सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास का प्रभावी उदाहरण बनती जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह योजना दर्शाती है कि सही नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।