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Chhattisgarh: Education department takes major action in Kanker, suspends 38 teachers simultaneously, disobeying rationalization order proves costly
कांकेर। छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए एक साथ 38 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उत्तर बस्तर कांकेर जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत अतिशेष घोषित शिक्षकों द्वारा आदेशों की अवहेलना किए जाने पर की गई है। निलंबन की खबर से जिले के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है और शिक्षकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है।
नई पदस्थापना पर ज्वाइन नहीं करने पर कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी, उत्तर बस्तर कांकेर द्वारा जारी आदेश के अनुसार शासन के निर्देशों के अनुरूप जिले में जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके तहत आवश्यकता से अधिक शिक्षकों को अतिशेष घोषित कर उन्हें अन्य विद्यालयों में नई पदस्थापना दी गई थी। संबंधित शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर नए विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करें।
बार-बार नोटिस के बावजूद नहीं किया कार्यभार ग्रहण
शिक्षा विभाग के अनुसार कई शिक्षकों ने नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की। विभाग ने इन्हें कई बार पत्र जारी किए और व्यक्तिगत रूप से भी सूचित किया, लेकिन इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कुछ शिक्षकों ने न्यायालय में याचिका दायर करने का हवाला दिया, लेकिन विभाग के समक्ष किसी भी शिक्षक ने स्थगन आदेश प्रस्तुत नहीं किया।
आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश में कहा गया है कि बिना किसी वैध स्थगन आदेश के नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं करना कर्तव्य में घोर लापरवाही है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर 38 अतिशेष शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
जुलाई 2025 तक ज्वाइन करना था अनिवार्य
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी रमेश निषाद ने बताया कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार जुलाई 2025 तक सभी अतिशेष शिक्षकों को अनिवार्य रूप से नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना था। इसके बावजूद आदेशों की अनदेखी करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई विभाग की मजबूरी थी। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए आदेशों का पालन जरूरी है।
शिक्षक संगठनों में चर्चा, अभिभावकों ने किया समर्थन
निलंबन की कार्रवाई के बाद शिक्षक संगठनों में तीखी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ संगठन इसे कठोर कदम बता रहे हैं, जबकि विभागीय अधिकारी इसे प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी ठहरा रहे हैं। वहीं अभिभावकों का कहना है कि युक्तियुक्तकरण के चलते लंबे समय से कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, ऐसे में यह कार्रवाई जरूरी थी।
