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Chhattisgarh: High Court strict on Bilaspur airport expansion, expressed displeasure over slow progress
बिलासपुर। चकरभाठा स्थित बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार और सीमित उड़ानों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने काम की धीमी गति पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार सहित संबंधित एजेंसियों को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट के साथ नया हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए।
नाइट लैंडिंग की अनुमति, फिर भी नहीं शुरू हुई उड़ानें
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि एयरपोर्ट को 6 फरवरी को नाइट लैंडिंग की अनुमति मिल चुकी है। इसके बावजूद दो महीने बाद भी एक भी रात की उड़ान शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में सेवा दे रही एयरलाइन तकनीकी कारणों का हवाला देकर नाइट ऑपरेशन शुरू नहीं कर रही है।
कोर्ट ने पूछा- जनता को लाभ क्यों नहीं?
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि जब सुविधाएं और अनुमति दोनों उपलब्ध हैं, तो आम जनता को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा। कोर्ट ने इस पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
अन्य एयरलाइनों को जोड़ने पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी पूछा कि केवल एक एयरलाइन पर निर्भर रहने के बजाय अन्य निजी एयरलाइनों को जोड़ने के लिए अब तक क्या प्रयास किए गए हैं। खंडपीठ ने इस संबंध में भी विस्तृत जानकारी हलफनामे में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
सरकार बोली- बातचीत जारी, जल्द निकलेगा समाधान
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने बताया कि एयरलाइनों के साथ बातचीत जारी है और जल्द समाधान निकलने की उम्मीद है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रामाकांत मिश्रा ने कहा कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए सेना की जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
17 अप्रैल को अगली सुनवाई
कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल तय की है। तब तक राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को एयरपोर्ट विस्तार, नाइट फ्लाइट संचालन और नई एयरलाइनों को जोड़ने के प्रयासों की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।